मशीन खराब:सिविल अस्पताल की एफेरेसिस मशीन खराब, 200 ओपीडी पर 1 डॉक्टर; डेंगू मरीजों का जिम्मा भी उसी को

अमृतसर10 दिन पहले
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एफोरेसिस मशीन। - Dainik Bhaskar
एफोरेसिस मशीन।
  • मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए अस्पताल से बाहर 12 से 15 हजार रुपए खर्च करने पड़ रहे

सिविल अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित पांचों वार्ड फुल हैं। दूसरी ओर खून से प्लेटलेट्स निकालने वाली एफेरेसिस मशीन भी खराब है। इतना ही नहीं अस्पताल में मेडिसिन का सिर्फ एक डॉक्टर है और उसी पर डेंगू मरीजों की भी जिम्मेदारी है। अस्पताल की एफेरेसिस मशीन खराब होने के कारण डेंगू मरीजों को ज्यादा रुपए खर्च करके बाहर से प्लेटलेट्स लेने पड़ रहे हैं।

आमतौर पर मरीज को अपनी किट और डोनर लाॅकर प्लेटलेट्स निकलवानी पड़ती है। चूंकि पहले यहां पर जनऔषधि केंद्र था और वहां से किट बमुश्किल 8 हजार रुपए में मिल जाती थी, जबकि बाहर इसी किट को खरीदने के लिए 12 से 15 हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। एफेरेसिस मशीन वर्ष 2009 में लगाई थी। कई बार स्टाफ ने अपने खर्चे पर ठीक कराया, लेकिन ठीक नहीं हुई। वर्तमान में इसकी बहुत जरूरत है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

जिले में 19 नए मरीज मिले

प्रदेश में अमृतसर डेंगू मामले में तीसरे स्थान पर है। जिले में बुधवार को 19 नए मरीज मिले हैं। सेहत विभाग के मुताबिक संक्रमित मरीजों की संख्या 882 पहुंच गई है। शहर में 40 इलाके एेसे हैं जहां पर डेंगू का प्रकोप अधिक है।

इधर डॉक्टर की भी कमी

वैसे तो सरकारी अस्पताल के कई विभागों में डॉक्टरों की कमी है, लेकिन डेंगू के दौर में सबसे अहम है मेडिसिन विभाग, जहां पर सिर्फ एक डॉक्टर काम कर रहा है। हेल्थ इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन राकेश शर्मा का कहना है कि अस्पताल में रोजाना 200 मरीजों की ओपीडी इसी डॉक्टर को डील करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि डेंगू के मरीजों के तीमारदारी की जिम्मेदारी भी इसी अकेले डॉक्टर पर है। मेडिसिन के डॉक्टरों की कमी से डेंगू मरीज भी प्रभावित हो रहे हैं। शर्मा की मांग है कि डेंगू के लगातार बढ़ रहे मामलों के बीच अस्पताल में कम से कम 4 डॉक्टर होने चाहिए।

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