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ऐसे कैसे चलेगा भगवान:कोरोना के साइड इफैक्ट- मंदिरों में नाममात्र चढ़ावा, खर्च चलाने के लिए तोड़नी पड़ रही एफडी

अमृतसरएक महीने पहले
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  • खर्च पहले जैसे मगर आय घट गई, पंडितों-सेवादारों को सैलरी देना हुआ मुश्किल, बिजली बिल पड़ रहे भारी
  • दुर्ग्याणा तीर्थ : पहले चढ़ावे में हर माह 50 लाख रुपए आते थे, अब महज 10 हजार
  • शिवाला बाग भाइयां : हर महीने 5 लाख रुपए के खर्चे, चढ़ावा रह गया 10 फीसदी

कोरोना संक्रमण के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं के नहीं पहुंचने से वहां आने वाला चढ़ावा नाममात्र का रह गया है। गुल्लक में इतने पैसे भी नहीं आ रहे कि दैनिक खर्च चलाए जा सकें।

पंडितों-पुजारियों को तनख्वाह देना तो दूर की बात है। इससे मंदिर कमेटियों का पूरा बजट गड़बड़ा गया है।

मंदिरों को मुख्य आय चढ़ावे से होती है जो कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुई जबकि खर्च पहले जैसे ही हैं।

ऐसे में मंदिर कमेटियों को दैनिक खर्च चलाने के लिए या तो बैंकाें/डाकघरों में रखे फिक्स डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाने पड़ रहे हैं या उनके अंगेस्ट लोन लेना पड़ रहा है।

दुर्ग्याणा तीर्थ : पहले चढ़ावे में हर माह 50 लाख रुपए आते थे, अब महज 10 हजार

दुर्ग्याणा मंदिर कमेटी के प्रधान एडवोकेट रमेश शर्मा के मुताबिक दुर्ग्याणा तीर्थ में पंडितों समेत कुल 215 सेवादार हैं जिनका सैलरी खर्च 13 लाख रुपए प्रतिमाह है।

हर महीने 12 लाख रुपए का बिजली बिल भी आता है। 22 मार्च से पहले तक दुर्ग्याणा के सभी मंदिरों में हर महीने कुल मिलाकर तकरीबन 50 लाख रुपए का चढ़ावा आता था जो आज की तारीख में महज 10 हजार रुपए प्रतिमाह रह गया है।

कोरोना के कारण दो माह तीर्थ के सभी मंदिर बंद रहे। अब मंदिर तो खुल चुके हैं मगर श्रद्धालु नहीं आ रहे।

बाहर से सैलानी न आने के कारण भी चढ़ावे पर असर पड़ा है। खर्च चलाने के लिए मंदिर कमेटी ने एफडी तुड़वाई है, क्योंकि हर महीने के खर्च तो पहले जैसे ही हैं।

शिवाला बाग भाइयां : हर महीने 5 लाख रुपए के खर्चे, चढ़ावा रह गया 10 फीसदी

शिवाला बाग भाइयां मंदिर ट्रस्ट के महासचिव हेमराज हांडा और संजय के मुताबिक लॉकडाउन से पहले रोजाना देशभर से हजारों श्रद्धालु ट्रस्ट की धर्मशाला में आकर ठहरते थे।

मंदिर में माथा टेकने लोकल श्रद्धालुओं की भी भीड़ लगी रहती थी। मंदिर का हर महीने डेढ़ लाख रुपए का बिजली बिल आता है।

लंगर के लिए डेढ़ लाख रुपए, पंडितों-सेवादारों की सैलरी के लिए डेढ़ लाख रुपए और गोवंश के चारे वगैरह के लिए 50 हजार रुपए प्रतिमाह चाहिए जबकि कोरोना के बाद मंदिर का चढ़ावा 10 फीसदी रह गया है।

फिलहाल तो मंदिर के खर्च किसी तरह चलाए जा रहे हैं मगर यह दौर लंबा खिंचा तो मुश्किल हो सकती है।

माता लाल देवी मंदिर : सेनिटाइजेशन आदि से खर्च 20% बढ़ा, चढ़ावा 2%

रानी का बाग स्थित माता लाल देवी मंदिर ट्रस्ट के प्रधान विजय कुमार शर्मा के मुताबिक लॉकडाउन से पहले मंदिर सुबह 5 बजे से देर रात तक खुला रहता था जबकि अब सुबह 5 से रात 8 बजे तक ही खोलने की अनुमति है।

इस दौरान दोपहर में 2 बजे से शाम 5 बजे तक मंदिर बंद रहता है। मंदिर ट्रस्ट का प्रतिमाह का खर्च 25 लाख रुपए से अधिक है।

इसमें पुजारियों-सेवादारों की सैलरी, बिजली बिल, भोग और दूसरे खर्च शामिल हैं। कोरोना के चलते सेनिटाइजर-मास्क की अनिवार्यता से खर्च 20% बढ़ गया जबकि चढ़ावा घटकर महज 2% रह गया।

शर्मा के अनुसार फिलहाल ट्रस्ट के पास खर्चे चलाने के लिए रिजर्व है। फिर भी जरूरत पड़ी तो एफडी वगैरह तुड़वाने के बारे में सोचा जाएगा।

वाल्मीकि तीर्थ : पहले हर माह सवा लाख आते थे, इस बार 3 महीने में आए डेढ़ लाख

रामतीर्थ स्थित भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल श्राइन बोर्ड के जनरल मैनेजर (जीएम) पी. कुमार भी कहते हैं कि खर्च बढ़ गए हैं जबकि चढ़ावा कम हो गया है।

पी. कुमार के अनुसार, ‘तीर्थ का बिजली और सिक्योरिटी का बिल हर महीने 14  लाख रुपए आता है। पहले हर महीने तीर्थ में तकरीबन सवा लाख रुपए का चढ़ावा आता था जो लॉकडाउन में नाममात्र का रहा गया।

फरवरी से मई तक दानपेटी में मात्र डेढ़ लाख रुपए आए थे। इसके बाद दानपेटी नहीं खोली गई, जबकि श्रद्धालुओं की सेनिटाइजेशन और मास्क की व्यवस्था करने के कारण खर्च बढ़ गया है।

पंजाब टूरिज्म विभाग बोर्ड को सालाना दो करोड़ रुपए भेजता है। इसी से खर्च चलते हैं।’

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