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श्री गुरु रामदास का 487वां प्रकाश पर्व:115 तरह के 222 क्विंटल फूलों से सजा दरबार साहिब, 13 तस्वीरों में देखें खूबसूरती

अमृतसरएक महीने पहले

अमृतसर साहिब को बसाने वाले और सिखों के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी का आज 487वां प्रकाश पर्व है। इस मौके पर दरबार साहिब को 115 तरह के 222 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने फूलों के साथ-साथ इसे खूबसूरत रोशनी से भी सजाया है। सजावट इतनी मनमोहक है कि आप एक टक देखते ही रह जाएंगे। पिछले साल कोविड के चलते भी यहां 1.50 लाख के करीब श्रद्धालु पहुंच गए थे, लेकिन इस साल 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दरबार साहिब में माथा टेकने का अनुमान है।

दरबार साहिब की खूबसूरती देख आप अपनी आंखें झपका भी नहीं पाएंगे।
दरबार साहिब की खूबसूरती देख आप अपनी आंखें झपका भी नहीं पाएंगे।

मिली जानकारी के अनुसार, थाईलैंड, इंडोनेशिया के अलावा कलकत्ता, दिल्ली, पूणे और बेंगलुरु से फूलों के 5 ट्रक भरकर आए थे। गुलदाउदी, गुलाब, मैरीगोल्ड, जरबेरा, सोन चंपा, ऑर्किड, लिलियम, कार्नेशन, टाइगर फ्लॉवर, सिंगापुरी ड्रफ्ट, स्टार फ्लॉवर, एलकोनिया, कमल गेंदा, हाइलेंडर, कमल और मोतिया के फूलों का उपयोग सजावट के लिए किया गया है। मुंबई से 100 से अधिक श्रद्धालु सिर्फ फूलों की सेवा के लिए इकबाल सिंह के निर्देशन में अमृतसर पहुंचे हैं। शुक्रवार को दरबार साहिब में सुंदर जलौ सजाए जाएंगे। वहीं रात के समय विशेष कवि सम्मेलन भी होगा। शाम को दरबार साहिब में आतिशबाजी होगी। लंगर में स्वादिष्ट पकवानों के साथ मिठाइयां भी बांटी जाएंगी।

कई श्रद्धालु अमृतसर सिर्फ फूलों की सेवा के लिए पहुंचे हैं। सुंदर फूल सभी को आकर्षित कर रहे हैं।
कई श्रद्धालु अमृतसर सिर्फ फूलों की सेवा के लिए पहुंचे हैं। सुंदर फूल सभी को आकर्षित कर रहे हैं।

इको फ्रेंडली आतिशबाजी होगी
प्रकाश पर्व पर आकर्षण का केंद्र आतिशबाजी है। यह प्रदूषण फ्री और वातावरण फ्रेंडली आतिशबाजी होगी, जिसके लिए 15 सदस्यों की टीम तैयार है। आज शाम सुंदर जलौ भी सजाएं जाएंगे। शाम को दीपमाला भी होगी और पूरे दरबार साहिब में परिक्रमा में दीप जलाए जाएंगे।

गुरु घर के बाहर फूलों से बनाया गया मोर।
गुरु घर के बाहर फूलों से बनाया गया मोर।

लाहौर में जन्मे थे श्री गुरु रामदास
गुरु रामदास का जन्म 9 अक्टूबर, 1534 को चूना मंडी में हुआ था, जो अब लाहौल में है। वे सिखों के चौथे गुरु थे। इन्होंने अमृतसर साहिब शहर की स्थापना की थी। इन्हीं के जन्मदिवस पर आज प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। अमृतसर पहले रामदासपुर के नाम से जाना जाता था।

गुरु घर का दृश्य। इस साल 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दरबार साहिब में माथा टेकने का अनुमान है।
गुरु घर का दृश्य। इस साल 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दरबार साहिब में माथा टेकने का अनुमान है।

जब जेठा जी को गुरु रामदास नाम मिला
गुरु रामदास जी के बचपन का नाम जेठा था। इनके पिता हरिदास और माता अनूप देवी जी थी। गुरु रामदास जी का विवाह गुरु अमरदास जी की पुत्री बीबी बानो से हुआ था। जेठा जी की भक्ति भाव को देखकर गुरु अमरदास ने 1 सितंबर 1574 को गुरु की उपाधि दी और उनका नाम बदलकर गुरु रामदास रखा। रामदास जी ने 1 सितंबर, 1574 ई. में गुरु पद प्राप्त किया था। इस पद पर वे 1 सितंबर, 1581 ई. तक बने रहे थे। उन्होंने 1577 ई. में 'अमृत सरोवर' नामक एक नगर की स्थापना की थी, जो आगे चलकर अमृतसर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

गुरु घर को जाने वाला रास्ता भी फूलों से सजा हुआ है।
गुरु घर को जाने वाला रास्ता भी फूलों से सजा हुआ है।

गुरु रामदास के महान कार्य:
1. गुरु रामदास ने सिखों के पवित्र सरोवर 'सतोषर' का निर्माण करवाया।
2. गुरु रामदास लोगों के प्रति सहिष्णुता में विश्वास रखते थे।
3. गुरु रामदास ने कई कविताओं और लावन की भी रचना की। आज भी सिख धर्म की शादियों में लावन गीत शगुन के तौर पर गाए जाते हैं। इन्हें 30 रागों का ज्ञान था। इन्होंने करीब 638 भजनों की रचना की।
4. गुरु रामदास जी के लिखे गए 31 अष्टपदी और 8 वारां को सिखों के पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' में संकलित किया गया।

दुख भंजनी बेरी के पास बने इसी स्थल पर बैठकर श्री गुरु रामदास जी दरबार साहिब का काम देखते थे और जाप भी करते थे।
दुख भंजनी बेरी के पास बने इसी स्थल पर बैठकर श्री गुरु रामदास जी दरबार साहिब का काम देखते थे और जाप भी करते थे।
सुंदर लाइटों से सजा रामगढ़िया बूंगा। शाम को दरबार साहिब में इको फ्रेंडली आतिशबाजी होगी।
सुंदर लाइटों से सजा रामगढ़िया बूंगा। शाम को दरबार साहिब में इको फ्रेंडली आतिशबाजी होगी।
बाबा दीप सिंह का शहीदी स्थल, जहां उन्होंने अपना शीश गुरुओं को समर्पित करके अपने प्राण दिए थे।
बाबा दीप सिंह का शहीदी स्थल, जहां उन्होंने अपना शीश गुरुओं को समर्पित करके अपने प्राण दिए थे।
फूलों की सेवा में व्यस्त संगत। यहां फूलों के 5 ट्रक भरकर आए थे।
फूलों की सेवा में व्यस्त संगत। यहां फूलों के 5 ट्रक भरकर आए थे।
दुख भंजनी बेरी के समीप नतमस्तक होता श्रद्धालु।
दुख भंजनी बेरी के समीप नतमस्तक होता श्रद्धालु।
बाबा बुढ़ा बेर को भी फूलों से सजाया गया है।
बाबा बुढ़ा बेर को भी फूलों से सजाया गया है।
फूलों से सजा श्री अकाल तख्त साहिब। यहां कई तरह के फूलों का उपयोग सजावट के लिए किया गया है।
फूलों से सजा श्री अकाल तख्त साहिब। यहां कई तरह के फूलों का उपयोग सजावट के लिए किया गया है।
गुरु घर का मुख्य द्वार और अंदर जाने के लिए लंबी कतारें लगी हैं। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं।
गुरु घर का मुख्य द्वार और अंदर जाने के लिए लंबी कतारें लगी हैं। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं।
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