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ओलंपिक में फिर चमके अमृतसरी मुंडे:हॉकी क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन के खिलाफ दिलप्रीत ने दिलाई बढ़त, गुरजंट ने दूसरा गोलकर जीत पक्की की

अमृतसर4 महीने पहले
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हॉकी मैच में जैसे ही दिलप्रीत सिंह ने गोल किया, टीवी पर मैच देख रहे परिजनों ने तालियां बजाईं। - Dainik Bhaskar
हॉकी मैच में जैसे ही दिलप्रीत सिंह ने गोल किया, टीवी पर मैच देख रहे परिजनों ने तालियां बजाईं।

टोक्यो ओलंपिक में रविवार को खेले गए हॉकी मैच में ब्रिटेन को हराकर अंबरसरी मुंडों ने एक बार फिर से अपनी चमक बिखेर दी है। टीम को विजयश्री दिलाकर इंडिया के साथ उन्होंने अमृतसर का नाम भी विश्वपटल पर उकेरा है।

ओलंपिक में वर्ष 1972 के बार ऐसा पहली बार है जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम सेमिफाइनल में पह़ुंची है। गुरुनगरी के दिलप्रीत ने 7वें मिनट में ब्रिटेन के खिलाफ गोल कर लोगों का दिल जीता ही था कि 16वें मिनट में गुरजंट ने एक और गोल दाग खुशी में चार चांद लगा दिए।

दिलप्रीत के पिता भी रह चुके हैं नेशनल लेवल प्लेयर

दिलप्रीत सिंह (21) के पिता बलविंदर सिंह निवासी बुताला ने बताया कि वह खुद नेशनल लेवल पर हॉकी के ओलंपिक खिलाड़ी रह चुके हैं। पूरे परिवार के खून में हॉकी का जुनून भरा पड़ा है। माता सुखवंत कौर ने बताया कि उनके बेटे दिलप्रीत ने जो कर दिखाया पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। उनकी दो बेटियां हैं जिनमें मनप्रीत बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुकीं। जबकि मनदीप कौर की शादी हो चुकी और वह इटली में हैं।

ब्रिटेन पर इंडिया की जीत से सबसे अधिक खुशी मिली : गुरजंट की मां

गुरजंट (26) के पिता बलदेव सिंह निवासी खलिहारा जंडियाला गुरु ने बताया कि क्वार्टर फाइनल का मैच पहला गोल होने के बाद से ही उनके पास लगातार फोन पर बधाइयां आने लगीं थीं। जैसे ही बच्चे हल्ला करने लगते तो उन्हें सुकून मिलता कि अंबरसरी मुंडे इतिहास रच रहे हैं।

मां सुखजिंदर कौर ने कहा कि ब्रिटेन से जीत पर सबसे अधिक खुशी मिली है। सेमिफाइनल भी टीम इंडिया के नाम ही होगा। टीवी में हर गोल देखने व गुरुनगरी के बेटों के गेंद की तरफ दौड़ने पर ही वाहेगुरु की कृपा के बोल गूंजने लगते।

हरमनप्रीत सिंह के माता-पिता का मन झूमा, लेकिन नाच नहीं सके

ओलंपिक खेलने गए जंडियाला ब्लाॅक स्थित तिम्मोवाल गांव के हॉकी प्लेयर हरमनप्रीत सिंह (25) की माता राजविंदर कौर ने कहा कि ब्रिटेन को हराने पर उनका मन खुशी से झूम रहा है, लेकिन गठिया की बीमारी के कारण वह नांच नहीं पा रही हैं।

पिता सरबजीत सिंह ने कहा कि खुशी का यह पल वह बयां नहीं कर सकते गुरुनगरी के बच्चे आज जीत की नई इबारत लिख रहे हैं। हरमन के पिता कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं, उन्हें उम्मीद है कि बेटा गोल्ड मेडल लेकर ही लौटेगा।

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