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कोरोना की मार:खर्चे बढ़े; आमदनी घटी, इसलिए 5 दिन में पेरेंट्स ने प्राइवेट से सरकारी स्कूलाें में शिफ्ट किए 52 बच्चे

अमृतसर4 दिन पहले
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  • पिछले साल में किसी का काम बंद हुआ तो किसी की जॉब छूटी, अब आर्थिक बोझ घटाने के लिए सरकारी स्कूलों में डाल रहे बच्चे
  • 827 प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ 5 दिनों में 67928 एडमिशन

सरकारी स्कूलों में 2021-22 के शिक्षा सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से की जा चुकी है। हालांकि 10 अप्रैल तक स्कूलों के बंद होने के कारण विद्यार्थी अभी नहीं आ रहे, मगर अध्यापक इन दिनों दाखिला बढ़ाने में लगे हैं। विभाग के निर्देश पर अध्यापकों घर-घर पहुंच कर लोगों काे सरकारी स्कूलाें में बच्चों को दाखिल करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इसी के चलते 827 प्राइमरी स्कूलाें में 1 से 5 अप्रैल के मात्र पांच दिन में 67,928 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। इन छात्रों में 52 ऐसे भी हैं, जिनके अभिभावकों को कोरोना के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है। इनमें से कई के कोरोना के चलते काम-धंधे बंद हाे गए तो कई की नौकरी चली गई।

इसलिए आर्थिक बोझ को कम करने के लिए अभिभावक अपने बच्चाें काे निजी स्कूलाें से शिफ्ट करके सरकारी स्कूलाें में दाखिल करवा रहे हैं। पिछले साल प्राइमरी स्कूलों में करीब 90 हजार स्टूडेंट्स थे। उप-जिला शिक्षा अधिकारी रेखा महाजन ने बताया कि सरकारी स्कूलाें में शिक्षा का स्तर पिछले कुछ सालों में बेहतर हुआ है।

इसलिए अभिभावक सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। विभाग ने दाखिले बढ़ाने लिए एनरोलमेंट बूस्टर टीमाें का गठन किया गया है। गांवों और शहरों में स्कूलों की खासीयत बताते फ्लैक्स लगाने के साथ-साथ पंचों-सरपंचों के साथ मीटिंग कर अभिभावकों को प्रेरित करने की नीति का फायदा भी मिल रहा है।

इधर विधायक की चेतावनी...निजी स्कूल संचालक पेरेंट्स की मुश्किल समझें, शिकायत आई तो कार्रवाई होगी

विधानसभा हलका नार्थ के विधायक सुनील दत्ती ने फीसों, एडमिशन चार्जेस को लेकर निजी स्कूलों के खिलाफ आ रही शिकायतों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण कारोबारी व आमजन आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। निजी स्कूल प्रबंधक पेरेंट्स की मजबूरी भी समझें।

विधायक ने कहा कि अगर किसी पेरेंट्स को बेवजह तंग किया गया तो वह सख्त कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसी क्लास के 50 बच्चों में से 40 का रिजल्ट दे दिया जाता है तो बाकी 10 की हालत कोई भली भांति समझ सकता है। वहीं जब स्कूल प्रबंधन वर्तमान में पेरेंट्स को पूरी फीसें भरने के लिए कहता है तो बच्चे पेरेंट्स का चेहरा पढ़ने लगते हैं। उनकी निजी स्कूलों से अपील है कि वह पेरेंट्स का साथ जरूर दें।

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