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  • Firecrackers Worth 10 Crores Were Burnt 3 Times More Than Last Year On Diwali; Air Quality Remained Dangerous From 7 To 12 In The Evening, It Will Take A Week To Clean Up

ग्रीन नहीं रेड दिवाली:दिवाली पर बीते साल से 3 गुणा ज्यादा 10 करोड़ के पटाखे जले; शाम 7 से 12 बजे तक खतरनाक रही एयर क्वालिटी, साफ होने में लगेगा हफ्ता

अमृतसर21 दिन पहले
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  • 3 फैक्टरियों ने प्रतिबंधित और पुराने घातक कैमिकलों से तैयार 7 करोड़ की फुलझड़ियां पूरे पंजाब में बेचीं
  • एक के पास लाइसेंस-जीएसटी नंबर तक नहीं, एसडीएम कराएंगे जांच

इस दिवाली पर शहर के लोगों ने बीते वर्ष से 3 गुणा ज्यादा 10 करोड़ रुपए के पटाखे फोड़कर इस त्योहार काे सेलिब्रेट किया। इस वजह से वीरवार शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक एयरक्वालिटी इंडैक्स 320 से 500 के खतरनाक स्तर के बीच रहा। वीरवार रात साढ़े 12 बजे एक्यूआई 500 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसी कारण पूरी रात लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती रही। सबसे ज्यादा सांस की बीमारियांे से ग्रस्त लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। इन पटाखों के कारण आने वाले एक हफ्ते तक लोगों को साफ हवा नसीब नहीं होगी। यदि बरसात हुई तो ही पहले राहत मिल सकती है।

पटाखे बनाने वाली जिले की तीन फैक्टरियों ने लोगों की पटाखों के प्रति दिवानगी के फायदा उठाते प्रतिबंधित और पुराने घातक कैमिकल्स से 7 करोड़ की फुलझड़ियां तैयार करवाई और पूरे पंजाब में बेची भीं। इन फुलझड़ियों का एक बड़ा हिस्सा अमृतसर में जला, जो कि वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बना। इतने बड़े स्तर पर प्रतिबंधित पटाखे तैयार होने के बावजूद प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले की गंभीरता काे समझते हुए एसडीएम राजेश शर्मा ने शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है।

पटाखों फैक्टरी और थोक व्यापारियों ने इस बार सुप्रीम कोर्ट के सिर्फ ग्रीन पटाखे ही बेचने जाने के आदेश की अवहेलना कर डाली। शहर की 3 फैक्टरियां ऐसी रही, जिन्होंने पुराने पड़े कैमिकल का यूज कर फुलझड़ियां बनाईं, जबकि ग्रीन पटाखे बनाने में इनका यूज नहीं किया जा सकता है। इनमें से एक ब्रांड के पास तो जीएसटी नंबर तक नहीं है। यही वजह है कि ग्रीन पटाखों तैयार करने के अलावा दूसरे तरह के घातक कैमिकल यूज करने से पटाखों की आवाज काफी तेज तो रही ही प्रदूषण का स्तर भी रेड जोन में पहुंच गया। 24 घंटे में ही एक्यूआई 80 से बढ़कर 321 तक पहुंच गया जबकि 500 तक अधिकतम एक्यूआई दर्ज किया गया।

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