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दशहरा:आजादी के बाद पहली बार दोपहर ढाई बजे रावण दहन, ‘श्रीराम’ नहीं, लंगूरों ने तीर चला लगाई आग

अमृतसर2 वर्ष पहले
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  • दशहरा ग्राउंड में लोगों की भीड़ बढ़ते देख दुर्ग्याणा कमेटी ने समय से पहले किया दहन

शहर में विजयदशमी पर्व पर रविवार काे सिर्फ दुर्ग्याणा मंदिर कमेटी ने ही रावण के पुतले का दहन किया। दुर्ग्याणा तीर्थ के साथ लगते दशहरा ग्राउंड में हुए रावण दहन में लोगों की बढ़ रही भीड़ काे देखते हुए पुतले काे दोपहर ढाई बजे ही अग्निभेंट कर दिया गया।

भारत-पाक विभाजन के बाद यह पहला मौका था, जब दोपहर में ही पुतलों को अग्निभेंट किया गया है। यही नहीं इस बार भगवान श्रीराम के स्वरूपों की जगह लंगूरी बाणा धारण किए बच्चों ने तीर मारकर 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले को आग लगाई। इससे पहले पुतला जलाने का समय 3 बजकर 10 मिनट रखा गया था। कोरोना संक्रमण को लेकर जिला प्रशासन के निर्देशों के मुताबिक इस बार पुतले में पटाखे भी कम डाले गए थे।

कुंभकरण-मेघनाद के पुतले भी नहीं
हर साल यहां दशहरा कमेटियों की ओर से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों को सूर्यास्त के समय एक-एक करके अग्निभेंट किया जाता था, मगर इस बार सिर्फ रावण का ही पुतला जलाया गया।

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