श्री गुरु का महल:जहां श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म हुआ, 14 साल के थे जब मुगलों के खिलाफ जंग लड़ी

अमृतसर5 महीने पहले
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अमृतसर स्थित गुरु का महल। - Dainik Bhaskar
अमृतसर स्थित गुरु का महल।

श्री गुरु तेग बहादुर जी का 401वां प्रकाश पूरे देश में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात के समय लाल किले से खुद संबोधन करने वाले हैं। लेकिन अमृतसर में उनके जन्मदिवस पर खास तैयारियां की गई हैं। श्री गुरु का महल, वहीं स्थान हैं, जहां सिखों के नवमें गुरु श्री गुरु तेग बहादरु जी ने जन्म लिया।

गुरु का महल में बना पुरात्न खूह।
गुरु का महल में बना पुरात्न खूह।

श्री गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के नौवें गुरु हैं और 21 अप्रैल को उनकी जयंती मनाई जाएगी। 1621 में जन्मे श्री तेग बहादुर हरगोबिंद साहिब के सबसे छोटे पुत्र थे। गुरु तेग बहादुर सिंह का जन्म बैसाख कृष्ण पंचमी को पंजाब के अमृतसर में श्री गुरु का महल में हुआ था। पूरा विश्व उन्हें योद्धा के रूप में जानता है, क्योंकि उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए 14 साल की उम्र में ही मुगलों के खिलाफ तलवार उठा ली थी। उनके बचपन का नाम त्यागमल है। 24 नवंबर 1675 को हत्या कर दी गई।

गुरु का महल में आज पूरा दिन के लिए कीर्तन दरबार सजाया गया है।
गुरु का महल में आज पूरा दिन के लिए कीर्तन दरबार सजाया गया है।

फूलों से सजाया गया गुरु का महल

401वें प्रकाश पर्व पर गुरु जी के जन्म स्थान गुरुद्वारा गुरु का महल को विशेष किस्म के फूलों व लाइटों से भव्य तरीके से सजाया गया है। गुरुद्वारा साहिब प्रकाश पर्व पर भव्य गुरमति कार्यक्रम गुरुद्वारा गुरु का महल व गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हाल में आयोजित किए जा रहे हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर का भी विशेष प्रबंध किया गया है।

गुरु का महल में हो रहा पाठ।
गुरु का महल में हो रहा पाठ।

तीन गुरुओं का निवास स्थान रहा गुरु का महल

गुरु का महल अमृतसर में गोल्डन टेंपल के बिल्कुल करीब स्थित हे। गुरु का महल की बात करें तो यह वह स्थान हैं, जहां श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म तो हुआ ही। इसके साथ ही यह स्थान श्री गुरु रामदास जी, श्री गुरु अर्जन देव जी और श्री गुरु हरगोबिंदर साहिब जी का निवास स्थान भी रहा है। इसी स्थान से माता गंगा जी संतान प्राप्ती के लिए हाथ से प्रसादे तैयार कर झबाल बाबा बुढ्‌ढा जी के पास गए थे। आज भी इस महल में पुरात्न खूह मौजूद है, जहां से गुरु साहिब पानी लिया करते थे।

पूरा दिन विभिन्न रागी जत्थे गुरुओं का सिमरण करेंगे।
पूरा दिन विभिन्न रागी जत्थे गुरुओं का सिमरण करेंगे।

श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन की कुछ बातें

  1. गुरु तेग बहादुर सिंह हिंदुओं को जबरन मुस्लिम बनाए जाने के सख्त खिलाफ रहे और उन्होंने खुद भी इस्लाम कबूलने से मना कर दिया था।
  2. जब मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में लोगों को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर किया गया था। उस समय, उन्होंने गैर-मुसलमानों को जबरन मुस्लिम बनाए जाने का विरोध किया था जिसके बाद औरंगजेब के आदेश पर उनकी दिल्ली में हत्या कर दी गई।
  3. गुरु तेग बहादुर सिंह के बचपन का नाम त्यागमल था। लेकिन कम उम्र में ही मुगलों के खिलाफ बहादुरी से जंग लड़ने की वजह से उन्हें तेग बहादुर का नाम दे दिया गया। जिसका मतलब होता है तलवार का धनी।
  4. उनके निष्पादन और दाह संस्कार के स्थलों को बाद में दिल्ली में गुरुद्वारा सीस गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब नाम के सिख पवित्र स्थानों में बदल दिया गया। उनकी फांसी का दिन 24 नवंबर को गुरु तेग बहादुर शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  5. जहां उनकी हत्या की गई थी उस जगह को बाद में गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब नाम के सिख पवित्र स्थानों में बदल दिया गया।
  6. गुरु तेग बहादुर सिंह ने साल 1665 में आनंदपुर साहिब शहर बनाया और उसको बसाया। वह गुरुबाणी, धर्म ग्रंथों के साथ-साथ शस्त्रों और घुड़सवारी भी जानते थे।
  7. इतना ही नहीं उन्होंने 115 शब्द भी लिखे हैं जो अब पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का हिस्सा हैं।