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  • In Tokyo Olympics, The Indian Hockey Team Scored 25 Goals In 8 Matches, Out Of Which 12 Were 'Amritsari Mundyan De'.

41 साल बाद रचा इितहास:टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने 8 मैचों में 25 गोल किए, इनमें से 12 गोल ‘अमृतसरी मुंड्यां दे’

अमृतसर9 महीने पहलेलेखक: शुभेन्दु शुक्ला
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गुरजंट के माता-पिता ने भांगड़ा डाला। - Dainik Bhaskar
गुरजंट के माता-पिता ने भांगड़ा डाला।
  • किसी के गांव में भंगड़ा डला तो कहीं लड्‌डू बांटकर मनाई जीत की खुशी
  • अकेले हरमनप्रीत ने ही 6 गोल दागे

टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी से हॉकी मैच जीतकर देश को 41 साल बाद कांस्य पदक दिलाने वाली भारतीय टीम में ‘अमृतसरी मुंड्यां’ का जलवा रहा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कुल गोलाें में से 48% गोल अमृतसरियों ने ही किए। ओलिंपिक के सफर में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कुल 8 मैचों में प्रतिद्वंदी टीमों के खिलाफ 25 गोल किए। इनमें से 12 गोल अमृतसर के हरमनप्रीत, गुरजंट सिंह, शमशेर सिंह और दिलप्रीत सिंह के थे।

सबसे ज्यादा जंडियाला गुरु के तिम्मोवाल गांव के हरमनप्रीत सिंह ने 6 गोल दागे। इसके बाद दूसरे नंबर पर खलैरा, गहरी मंडी के गुरजंट सिंह रहे जिन्होंने 3 गोल किए। वहीं बाबा बकाला साहिब के बुताला गांव निवासी दिलप्रीत सिंह ने 2 और अटारी गांव के शमशेर सिंह ने 1 गोल करके अमृतसर का लोहा मनवाया।

वीरवार को जर्मनी जैसी मजबूत टीम को हॉकी में हराने के बाद अमृतसर जिले में हर ओर जश्न का माहाैल है। चाराें खिलाड़ियों हरमनप्रीत, गुरजंट सिंह, शमशेर सिंह और दिलप्रीत सिंह के घरों पर बधाइयों का तांता लगा है। वहीं परिजन भी जीत से फूले नहीं समा रहे। हर किसी को अपने मुंडों पर नाज है। गुरजंट के गांव खलैरा और दिलप्रीत सिंह के गांव बुताला में दोनों के माता-पिता और गांववालों ने भांगड़ा डाला। वहीं दिनभर एक-दूसरे काे लड्‌डू खिलाकर खुशियां बांटते रहे।

गुरजंट सिंह ने अपने मामा से सीखी थी हॉकी की बारीकियां
खलैरा, गहरी मंडी निवासी गुरजंट सिंह (26) ने 8 बरस की उम्र में हॉकी का दामन थाम लिया था। रेलवे की कोच फैक्टरी में तैनात मामा हरदेव सिंह को हॉकी खेलते देखकर उन्हें हॉकी से लगाव हुआ था। प्रारंभिक गुरु मामाजी ही रहे, जिनसे गुरजंट ने हॉकी की बारीकियां सीखीं। गुरजँंट के पिता बलदेव सिंह ने बताया कि वे किसान हैं और उनके पास 6 एकड़ जमीन है।

गुरजंट को 10 बरस की उम्र में शाहबाद हॉकी अकादमी में एडमिशन कराया था। यहां कोच रणजीत सिंह ने गुरजंट को हॉकी में माहिर बनाया। गुरजंट के पिता ने बताया कि बेटे की कामयाबी से वे इतने खुश हैं कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते। गुरजंट के घर सुबह से बधाइयां देने वालाें का तांता लगा हुआ है। 300 से ज्यादा लाेग फोन पर शुभकामनाएं दे चुके हैं।

दिलप्रीत और बाकी टीम निडर होकर खेली : बलविंदर सिंह
बाबा बकाला साहिब(गुरप्रीत सिंह)। टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली हॉकी टीम के खिलाड़ी दिलप्रीत के पिता और हॉकी कोच बलविंदर सिंह ने कहा कि भारतीय हॉकी टीम में वीरवार को अलग ही जोश दिख रहा था। टीम के सभी खिलाड़ियों का एनर्जी लेवल भी हाई था।

हालांकि मैच के शुरुआत में ही विरोधी टीम जर्मनी भारत पर बढ़त बना ली थी। लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने संयम बरता और आत्मविश्वास बनाए रखा। उसके बाद भारतीय टीम अटेकिंग मोड में आई और लगातार 4 गोल दागकर लगभग जीत सुनिश्चित कर ली थी। जर्मनी जैसी मजबूत टीम को हराना भारतीय हॉकी के स्वर्ण काल की याद दिलाता है। उनका बेटा ही नहीं, पूरी टीम निडरता से लड़ी।

13 किलोमीटर दूर अकेडमी तक पैदल जाते थे हरमनप्रीत
हरमन की मां राजविंदर कौर ने बताया कि उनके बेटे को 7 साल की उम्र से ही हॉकी खेलने का शौक था। 5वीं कक्षा में जब हरमनप्रीत 9 साल के था तभी उसे उसने हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। सेंट सोल्जर डे-स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की और यहीं पर हॉकी खेला और आज ओलिंपिक खेलकर गुरुनगरी का नाम रोशन किया है।

सेंट सोल्जर स्कूल उनके गांव से 13 किलोमीटर दूर है, जहां वह पैदल ही निकल जाया करते थे। स्कूल में जोगिंदर सिंह ढिल्लों उनके काेच थे। हॉकी अच्छा खेलने के कारण जालंधर स्थित कर्म सिंह अकेडमी में दाखिला कराया था। हरमनप्रीत के बेगोवाल स्थित किसान परिवार की लड़की से मंगनी हो चुकी है। लड़की एचडीएफसी बैंक में कार्यरत है। शादी कब होगी यह तय नहीं है।

दादा की मौत के कारण शमशेर के घर नहीं मनाया गया जश्न
शमशेर सिंह के अटारी स्थित घर पर जीत का जश्न नहीं मनाया गया। शमशेर ने परिवार को जीत की खबर दी तो उधर से दादा के निधन की खबर मिली। बुधवार देर रात शमशेर के दादा का निधन हो गया था, लेकिन जर्मनी से कांस्य पदक के लिए होने वाले हॉकी मैच में शमशेर के खेल पर विपरीत असर न पड़े इसलिए दादा के मौत की बात परिजनों उसे नहीं बताई।

शमशेर सिंह (24) के पिता हरदेव सिंह व मां हरप्रीत कौर ने बताया कि वह छोटे किसान हैं। 5 एकड़ जमीन उनके पास है। गांव से 1 किलोमीटर दूर श्रीहरकृष्ण स्कूल में 5वीं में एडमिशन कराया था। बेटे ने ब्रांच जीतकर देश का नाम रोशन किया जिसको लेकर परिवार में जीत की खुशी है। लेकिन शमशेर के दादा जोगिंदर सिंह (70) के निधन के कारण जश्न नहीं मनाया गया।

शागिर्द मुझसे बड़ा हो गया, ये मेरे लिए गर्व की बात : जुगराज
हरमनप्रीत जुगराज सिंह को अपना आइडल मानते हैं। हरमन की कामयाबी के सवाल पर दुनिया के नंबर वन ड्रैग फ्लिकर रहे और वर्तमान में अमृतसर के एडीसीपी जुगराज सिंह ने कहा कि ओलिंपिक में पदक लाकर उनका शागिर्द हरमन उनसे बड़ा हो गया, यह उनके लिए गर्व की बात है। टोक्यो ओलिंपिक में अब तक भारत के पुरुषों और महिलाओं की टीमों का प्रदर्शन शानदार रहा है। जर्मनी पर जीत भारतीय हॉकी के सुनहरी दौर की वापसी है।

जिले के शेरों का रहा जलवा

  • गुरजंट सिंह 03
  • दिलप्रीत सिंह 02
  • शमशेर सिंह 01

हॉकी खिलाड़ी बोले
अटैकिंग खेल के साथ डिफेंस भी मजबूत रखा, इसलिए जीते

एडीसीपी जुगराज सिंह और पूर्व हाॅकी ओलिंपियन बलविंदर सिंह शम्मी, हाॅकी काेच मनमिंदर सिंह पल्ली और काेच बलविंदर सिंह बुताला ने कहा कि जर्मनी के साथ मैच में दाेनाें टीमाें ने अटैकिंग गेम खेला। खिलाड़ी डू और डाई के मूड में थे। टीम आत्मविश्वास से भरी थी। पहले दाे क्वार्टर तक जर्मनी 3-1 के साथ लीड पर थी। इसके बाद हार्दिक व हरमनप्रीत के गाेलाें ने टीम काे बराबरी पर लाया। फिर पैनल्टी स्ट्राेक में रूपिंदरपाल व सिमरन ने गाेल कर टीम को 5-3 पर पहुंचाकर जीत पक्की कर दी थी।

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