अमृतसर और जालंधर में हॉकी प्लेयर्स के घर जश्न:गुरजंट की मां ने कहा- ये ब्रॉन्ज मेरे लिए तो गोल्ड जैसा; मनप्रीत की मां बोली-मेरी अरदास कबूल हो गई

अमृतसर/जालंधर9 महीने पहले
हॉकी खिलाड़ी गुरजंट सिंह की मां का मुंह मीठा कराते परिजन।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने आखिरकार इतिहास रच ही दिया। शानदार खेल दिखाते हुए भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। टीम इंडिया ने जर्मनी को 5-4 से हरा दिया है। ओलिंपिक में टीम को 1980 में मॉस्को में पदक मिला था, तब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने गोल्ड जीता था।

टीम में अमृतसर के 4 खिलाड़ी
टीम में पंजाब के अमृतसर जिले के 4 खिलाड़ी गुरजंट सिंह, दिलप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह और शमशेर सिंह खेले। मैच में दो गोल करने वाले सिमरनजीत सिंह, गुरजंट सिंह के ममेरे भाई हैं। इसलिए गुरजंट के परिवार में डबल जश्न का माहौल है। दोनों खिलाड़ियों के परिवारों ने पूरा मैच देखा। अब जीत की खुशी में परिवार फूला नहीं समा रहा। ढोल बज रहा है, जिसकी थाप पर पूरा परिवार थिरक रहा है।

अमृतसर में भावुक हुईं गुरजंट सिंह की मां
गुरजंट की मां और सिमरनजीत की बुआ सुखजिंदर कौर का कहना है कि उनके लिए ब्रॉन्ज ही स्वर्ण पदक है। बेटों ने 41 साल पुराना कर्ज उतार दिया। गुरंजट और सिमरन दोनों भाइयों ने बहुत अच्छा तालमेल बिठाकर प्रदर्शन किया। सिमरन ने तो दो गोल किए। 1972 के बाद भारतीय टीम ने एक बार फिर इतिहास दोहराया है। मुझे यकीन नहीं हो रहा, मेरे बेटों ने इतनी बड़ी खुशी दी है कि आंखों में आंसू आ गए। पिता की आंखें भी भर आईं। पूरा परिवार भावुक है, गर्व से सीना चौड़ा हो गया है।

जीत का जश्न मनाता गुरजंट सिंह का परिवार
जीत का जश्न मनाता गुरजंट सिंह का परिवार

पिता बोले- वो कहकर गया था, मेडल लेकर लौटेगा
गुरजंट के पिता बलदेव सिंह ने बताया कि वो जाते हुए कहकर गया था कि मेडल लेकर लौटेगा। चाहे कोई भी पदक मिला, बेटे ने अपना कहा पूरा किया, मेरे लिए इतना बहुत है। सिमरनजीत जिसने दो गोल किए हैं, वो गुरजंट के मामा का बेटा है। दोनों भाई बेहतरीन तालमेल बनाकर खेल रहे थे। जब दो भाई मैदान में होते हैं तो तालमेल मजबूत होता है। मुझे मेरे देनों बेटों पर गर्व है, अब बस घर आ जाएं जल्दी।

बहन बोली- करेले की सब्जी बनाकर खिलाऊंगी
गुरजंट सिंह की बहन गुरप्रीत कौर भाई की जीत पर भांगड़ा और बोलियां डालकर थिरक रही हैं। वह कहती है कि आज मेरे पांव जमीन पर नहीं हैं। जर्मनी एक ऐसी टीम थी, जो अपनी अटैकिंग गेम और पेनल्टी कॉर्नर के लिए जानी जाती थी, लेकिन भारतीय टीम के आगे उनकी नहीं चली। अब भाई के आने पर उन्हें उनकी पसंदीदा करेले की सब्जी बनाकर खिलाऊंगी। बस वो जल्दी से लौट आएं।

कैप्टन मनप्रीत सिंह के घर भी जश्न
जालंधर में भी हॉकी खिलाड़ियों के घर पर खास रौनक देखी जा रही है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह के घर बधाई देने वालों की भीड़ लगी हुई है। मनप्रीत की मां मनजीत कौर ने कहा, 'हम अरदास कर रहे थे और वो कबूल हो गई।' मैच का रिजल्ट आते ही हॉकी टीम में शामिल जालंधर के ही खिलाड़ी मनदीप सिंह के पिता रविंदर सिंह अपने परिवार के साथ मनप्रीत के घर पहुंच गए। वहां रविंदर सिंह ने खुद ढोल बजाया और दोनों परिवारों के सदस्यों ने नाच कर अपनी खुशी जताई।

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