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इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में भ्रष्टाचार:33 करोड़ के टेंडरों में 10 करोड़ का घालमेल; ट्रस्ट अधिकारियों पर मिलीभगत कर 5% रिश्वत लेने का आरोप, विजिलेंस ने मांगा रिकाॅर्ड

अमृतसर2 महीने पहले
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  • चीफ विजिलेंस अफसर को शिकायत-ट्रस्ट में पैठ रखते नेताओं, अफसरों और ठेकेदारों में मिलीभगत
  • फरवरी महीने में लगाए विकास के कामों के टेंडर पूल कर मात्र 3 से 4% लेस पर दिए गए
  • दैनिक भास्कर ने फाइनेंशियल बिड खुलने से एक दिन पहले कर दिया था पूलिंग का खुलासा

अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आ गया है। इसमें ट्रस्ट में अच्छी पैठ रखते नेताओं और अफसरों पर फरवरी में विकास के कामों के लगाए गए 33 करोड़ के टेंडर ठेकेदारों से पूल करवाकर सरकार को 10 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

इस संबंध में रणधीर सिंह नामक शख्स की ओर से की गई शिकायत चीफ विजिलेंस आॅफिसर (सीवीओ) लोकल बाॅडीज को पहुंची हैै। इसके बाद सीवीओ ने ट्रस्ट के ईओ को पत्र लिखकर इन टेंडरों के अलावा इससे पहले और बाद में लगाए गए टेंडरों का रिकाॅर्ड भी मांगा है। शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि मिलीभगत से पूल किए गए टेंडरों में 5% तक रिश्वत ली गई है।

शिकायतकर्ता ने लिखा है कि ट्रस्ट ने फरवरी 2021 में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 33 करोड़ के टेंडर लगाए थे। इसमें नेताओं, अफसरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत करके टेंडर पूल करवाए। इससे पंजाब सरकार को 10 करोड़ का नुकसान हुआ। गौरतलब है कि ये टेंडर पूल करके 3 से 4% लेस पर डाले जाने की चर्चा थी।

सड़कों पर लुक बिछाने, चौड़ीकरण, इंटरलॉकिंग, पार्क रेनोवेशन, वाटर सप्लाई लाइन और सीवरेज के काम होने थे
ट्रस्ट की ओर से लगाए 33 करोड़ के टेंडरों में सड़कों पर लुक बिछाने, चौड़ीकरण, इंटरलॉकिंग, पार्क रेनोवेशन और रिपेयर, सीसी फ्लोरिंग, आउटडोर जिम, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस, लाइट्स लगाने, सेंट्रल वर्ज रिपेयर, पेंटिंग और वाटर सप्लाई लाइन-सीवरेज के काम शामिल थे। सबकी टेक्निकल बिड खुलने के बाद फाइनेंशियल बिड खुलने से पहले ही टेंडर पूल होने का शोर मच गया था। जिसके बाद दैनिक भास्कर ने 17 फरवरी 2021 के अंक में इन टेंडरों की फाइनेंशियल बिड खुलने से पहले पूल होने की खबर छापी थी।

पहले 35% की लेस तक जाते रहे टेंडर, मगर इन टेंडरों में लेस नाममात्र
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि इन्हीं कामों के पुराने टेंडर 35% लेस तक जाते रहे हैं, मगर फरवरी में लगे 33 करोड़ के टेंडर मात्र 3 से 4 प्रतिशत की लेस जाने की बात सामने आई है। इसमें ट्रस्ट में पैठ रखते नेताओं, अफसरों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत दिखती है। उसके बाद डायरेक्टर लोकल बाॅडीज ने चीफ विजिलेंस ऑफिसर को जांच के निर्देश दिए हैं। अब चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने ट्रस्ट के ईओ से इन टेंडरों के अलावा इससे पहले और बाद वाले टेंडरों का रिकॉर्ड जांच के लिए मांगा है।

सबसे पहले वर्ष 2016 में सामने आया था ट्रस्ट में टेंडर पूल का खेल
वर्ष 2016 में सबसे पहले ट्रस्ट के टेंडरों में धांधली का खेल सामने आया था। एक पूर्व कांग्रेसी नेता ने इस संबंध में बकायदा वीडियो क्लिप जारी किए गए थे। उक्त नेता ने आरोप लगाया था कि काम अलाॅट करने से पहले ही ठेकेदार का नाम तय हो जाता है। इसी दबाव में पुराने ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले पा रहे। इससे चहेतों को आसानी से कांट्रेक्ट दिलाए जा रहे हैं।

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