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माताओं का संतान प्रेम:वृद्धाश्रम में रहते प्रेमलता दिनभर पौधों की करती हैं देखभाल, ताकि बच्चे फलें-फूलें; बेटा-बेटियों को दुआ बाद निवाला खातीं हैं जसविंदर

अमृतसर15 दिन पहले
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माताओं का संतान प्रेम - Dainik Bhaskar
माताओं का संतान प्रेम
  • परिवार से दूर रह रहीं महिलाएं बच्चों को कोसने की बजाए उनकी बेहतरी के लिए कामना कर रहीं
  • तारांवाला पुल स्थित गुरु रामदासजी वृद्धघर में रहने वाली 70 वर्षीय प्रेमलता के पति का निधन हो गया

किसी ने सच ही कहा है-मेरी तकदीर में एक भी गम ना होता, अगर तकदीर लिखने का हक मेरी मां को होता...। हालांकि बदलते परिवेश में मां के प्रति औलादों का नजरिया बदलता जा रहा, लेकिन मां ने अपनी ममता को कम नहीं किया।

भले ही बच्चे घर से निकाल दें, दुख और संताप दें। हर स्थिति-परिस्थिति में मां उनकी खुशहाली की कामना करती है। 68 वर्षीय जसविंदर कौर और 70 वर्षीय प्रेमलता भी ऐसी ही ममता की मूरत हैं। जो वृद्धघर में रहती हैं, लेकिन यहां से भी उनकी सलामती की दुआ करती हैं।

गलत संगत में पड़ा बेटा और सब तबाह हो गया

अच्छे परिवार से संबंधित जसविंदर की 3 बेटियां और एक बेटा है। बेटियां शादीशुदा हैं। बेटा भी अच्छी नौकरी करता था, लेकिन इसी बीच वह गलत संगत में पड़ गया और सब खत्म हो गया। पति की मौत हुई तो वृद्धाश्रम में आसरा लेना पड़ा। यहां परिवार की तरह से परवरिस मिलती है, लेकिन वह बच्चों को नहीं भूल पाईं। यही कारण है कि जब खाना खाने बैठती हैं तो निवाला हलक में डालने से पहले बच्चों की खुशहाली की दुआ करती हैं।

मना करने के बाद भी पेड़-पौधों को रोजाना पानी देती हैं प्रेमलता

तारांवाला पुल स्थित गुरु रामदासजी वृद्धघर में रहने वाली 70 वर्षीय प्रेमलता के पति का निधन हो गया है। औलाद के रूप में एक बेटी है। शादीशुदा होने से बेटी के साथ नहीं रहतीं और यहां आ गई हैं। वह बताती हैं कि बेटी और उसके बच्चे अक्सर मिलने आते हैं। उनका कहना है कि वह भले ही यहां रहती हैं, लेकिन मन हमेशा बच्चों मेंं बसता है। आश्रम की इंचार्ज पूनम कहती हैं कि सुबह उठकर सबसे पहले पौधों को पानी देती हैं। कहती हैं कि पौधे हमेशा फलने-फूलने चाहिए। उनको ऐसा देख तसल्ली मिलती है कि उनके बच्चे भी ऐसे ही खुशहाल होंगे।

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