जानिए आखिर क्यों मनाए जाते हैं माता के नवरात्रि:दो पौराणिक कथाएं प्रचलित; अमृतसर में मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, चौकी स्थापित करके 8 दिन के व्रत शुरू किए गए

अमृतसर15 दिन पहले
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मां लौंगां देवी मंदिर में स्थापित पिंडी स्वरूपों के समक्ष नतमस्तक होती महिला। - Dainik Bhaskar
मां लौंगां देवी मंदिर में स्थापित पिंडी स्वरूपों के समक्ष नतमस्तक होती महिला।

शारदीय नवरात्रि हर साल शरद ऋतु में अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि गुरुवार के दिन से शुरू हुए हैं। नवरात्रि में 9 दिनों तक भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी किया जाता है। इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि एक साथ पड़ रही है, इसी वजह से शारदीय नवरात्र 8 दिनों तक ही होगा।

लेकिन नवरात्रि क्यों मनाए जाते हैं, इसे लेकर हिन्दू समाज में दो पैराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, महिषासुर नामक एक राक्षक ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके उनसे वरदाना मांगा था कि दुनिया में कोई भी देव, दानव या धरती पर रहने वाला मनुष्य उसका वध न कर सके। इस वरदान को पाने के ​बाद महिषासुर आतंक मचाने लगा। उसके आतंक को रोकने के लिए शक्ति के रुप में मां दुर्गा का जन्म हुआ। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच 9 दिनों तक युद्ध चला और 10वें दिन मां ने महिषासुर का वध कर दिया।

दूसरी कथा के अनुसार, जब भगवान राम लंका पर आक्रमण करने जा रहे थे तो उससे पहले उन्होंने मां भगवती की अराधना की। भगवान राम ने 9 दिनों तक रामेश्वरम में माता का पूजन किया और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया। 10वें दिन राम जी ने रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की थी। तभी विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है।

माता लाल देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़।
माता लाल देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़।

बता दें कि नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पहले दिन लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर दुर्गा स्तुति का पाठ किया। इसके उपरांत अपने घरों में मंदिर साफ करके कलश स्थापना की। ध्यान रखें कि माता की चौकी की स्थापना करने से पहले वहां स्वास्तिक बना लें। इसके अलावा कलश स्थापना की पूजा सामग्री को भी एक जगह एकत्रित करके रख लें, ताकि पूजा के समय किसी तरह की कोई परेशानी न हो। चौकी स्थापित होने के बाद मां दुर्गा स्तुति का पाठ करें।

कलश व खेत्री स्थापित करने के लिए सामग्री खरीदते श्रद्धालु।
कलश व खेत्री स्थापित करने के लिए सामग्री खरीदते श्रद्धालु।

मां शैलपुत्री का प्रिय रंग सफेद है

पहला नवरात्र मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। मां शैलपुत्री को सफेद रंग अधिक प्रिय होता है, इसलिए उन्हें सफेद रंग की बर्फी का भोग लगाएं। साथ ही पूजा में सफेद रंग के फूल अर्पित करें। इतना ही नहीं, पूजा करते समय सफेद वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। इसके बाद भोग लगे फल और मिठाई को प्रसाद के रूप में लोगों को बांट दें। जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए एक पान के पत्ते पर लौंग, सुपारी और मिश्री रखकर अर्पित करें।

शिवाला बाग भाइयां।
शिवाला बाग भाइयां।
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