कोरोना में नायकों को सजा की तैयारी:दर्जा चार कर्मचारियों को जॉब से हटाने का चल रह प्रयास, मंत्री वेरका के कार्यालय में सौंपा ज्ञापन

अमृतसर25 दिन पहले
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गुरु नानक देव अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
गुरु नानक देव अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी।

कोरोना काल में फ्रंट लाइन वर्कर के तौर पर काम करने वाले दर्जचार कर्मचारियों को निकालने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। यह वे फ्रंट लाइन वर्कर हैं, जिन्होंने डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी थी। प्रशासन का कहना है कि कोरोना काल से पहले व कोरोना काल के बीच में इन कर्मचारियों को आउट सोर्सिंग के माध्यम से रखा गया था। जिन्हें अब 30 सितंबर को रिलीव किया जा रहा है। लेकिन कर्मचारी उन्हें ना निकालने की अपील कर रहे हैं।

मंत्री वेरका के कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए।
मंत्री वेरका के कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए।

गुरप्रीत कौर ने जानकारी दी कि कोविड एमरजेंसी को मद्देनजर रखते हुए विभिन्न दर्जाचार कर्मचारियों को ड्यूटी पर रखा गया था। यह सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर व पटियाला के अलावा फरीदकोट स्थित गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज में भी रखे गए थे। इस इमरजेंसी में सभी कर्मचारियों ने ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाई। लेकिन अब अचानक ही उन्हें 30 सितंबर को रिलीव करने के आदेश दे दिए गए हैं। कर्मचारियों ने सरकार के इस फैंसले के खिलाफ गुरु नानक देव अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद सभी कर्मचारी मंत्री राज कुमार वेरका के कार्यालय गए और वहां अपना ज्ञापन भी सौंपा। कर्मचारियों ने कहा कि एक तरफ सरकार नौकरियां देने के लिए रोजगार मेले निकाल रही है। लेकिन उन्हें जॉब से निकाल रही है। उन्होंने मांग उठाई है कि दोनों ही अस्पतालों में सफाई कर्मचारियों की पोस्टें खाली हैं, उन्हें जॉब से ना निकालते हुए अस्पताल में ही एडजस्ट किया जाए।

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