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कोरोना से मरे मनोरोगी का दूसरे दिन भी संस्कार नहीं:प्रशासन से बिना पोस्टमार्टम संस्कार होने देने के लिखित निर्देश चाहता है मनोरोग अस्पताल

अमृतसर24 दिन पहले
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गुरु नानक देव अस्पताल में इलाज के दौरान कोरोना से मरी विद्या सागर मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट (अस्पताल) की महिला मनोरोगी कलावती के शव का संस्कार रविवार को दूसरे दिन भी नहीं हो सका। नतीजतन शव अस्पताल की मॉर्चरी में रखा हुआ है और मसला प्रशासन, सेहत विभाग और इंस्टीट्यूट प्रबंधन के बीच फंसा हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को प्रशासन की तरफ से इस बाबत कोई फैसला लिया जा सकता है।

मेंटल अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सविंदर सिंह के मुताबिक मजिस्ट्रेट की पहल पर फिरोजपुर पुलिस साल 2009 में कलावती को उनके यहां लाई थी। तब से वह यहीं रह रही थी। 15 मई को उसे बुखार हुआ और इसके बाद उसे गुरु नानक देव अस्पताल में भेजा गया, जहां इलाज के दौरान वह कोरोना पॉजिटिव आ गई और 29 मई को उसकी मौत हो गई।

इसके बाद प्रशासन की तरफ से संस्कार करने की बात चली तो इंस्टीट्यूट की तरफ से उसके अपने प्रोटोकाल के मुताबिक पोस्टमार्टम करने को कहा गया लेकिन कोरोना के चलते ऐसा करना संभव नहीं था नतीजतन संस्कार नहीं हो सका। डॉ. सविंदर सिंह की तरफ से इस बारे एसडीएम-2 इनायत गुप्ता से संपर्क किया गया था और आगे गुप्ता ने सिविल सर्जन से प्रोटोकाल मांग लिया था। इसमें उपरोक्त पहलू स्पष्ट था।

ऐसे में डॉ. सविंदर कहते हैं कि मरीज ज्यूडिशियली के जरिए आया था ऐसे में उनको मेंटल अस्पताल के प्रोटोकाल को फॉलो करना है। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन ही कुछ कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ इनायत गुप्ता ने बताया कि मामला उनके ध्यान में चुका है और इसको लेकर सोमवार को कोई उचित कदम उठाया जाएगा और संस्कार होगा।

मामला कोर्ट का, ह्यूमन राइट वाले मरीज के मरने का कारण पूछेंगे तो जवाब नहीं होगा : डॉ. सविंदर

मेंटल अस्पतालों में जेल की ही तरह से प्रोटोकाल होते हैं और वहां जिस किसी की भी मौत होती है उसका पोस्टमार्टम होता है और सारी रिपोर्ट रखनी होती है। क्योंकि आमतौर पर मेंटल अस्पतालों में होने वाली मौतों को लेकर ह्यूमन राइट संगठन और दूसरी समाज सेवी संस्थाएं अक्सर आगे आ जाती हैं।

डॉ. सविंदर कहते हैं कि मान लिया कि बिना पोस्टमार्टम के संस्कार कर दिया जाता है और कल कोई ऐसी संस्था या फिर महिला का कथित वारिस आ कर स्थिति जानना चाहेगा तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा। ऐसी स्थिति में अगर प्रशासन की तरफ से जारी कोई आदेश-निर्देश होगा तो वह उसे दिखा कर स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।

वहीं दूसरी तरफ कोरोना मरीजों के मामले में पोस्टमार्टम का विधान नहीं है, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है। किसी मरीज का पोस्टमॉर्टम गंभीर परिस्थितियों में होता है। उसकी मौत के कारण पर शक हो, या फिर दूसरों का कोई बड़ा जानी नुकसान होने वाला हो। कुल मिला कर मामले का निपटारा जिला प्रशासन को ही कोई फरमान जारी करके करना होगा।

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