जलियावालां में शहीदों को श्रद्धांजलि देने गई थीं क्वीन:एयरपोर्ट से गोल्डन टैंपल जाना था, अचानक काफिले ने रास्ता बदला; नंगे पैर स्मारक में गईं

अमृतसर5 महीने पहले

क्वीन एलिजाबेथ-II का गुरुवार देर रात को निधन हो गया। 96 साल की एलिजाबेथ 70 साल तक ब्रिटेन की क्वीन रहीं। 1997 में भारत दौरे के समय महारानी एलिजाबेथ अमृतसर आई थीं। यहां उन्होंने गोल्डन टैंपल में माथा टेका था। इससे भी खास बात यह है कि क्वीन ने जलियावालां बाग पहुंचकर वहां शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी।

14 अक्टूबर 1997 को अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड होने के बाद क्वीन एलिजाबेथ के काफिले को एयरपोर्ट से सीधे गोल्डन टैंपल पहुंचना था, लेकिन वे सीधे जलियांवाला बाग पहुंच गईं। उनके कार्यक्रम में यह बदलाव आखिरी समय में हुआ था। क्वीन ने जलियांवाला बाग में उन भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें ब्रिटिश राज के दौरान जनरल डायर ने गोलियों से भून दिया था। क्वीन नंगे पैर जलियावालां पहुंची थीं।

यह फोटो 14 अक्टूबर 1997 को ली गई थी। तब क्वीन एलिजाबेथ नंगे पैर अमृतसर के जलियांवाला बाग में शहीदों को नमन करने गई थीं।
यह फोटो 14 अक्टूबर 1997 को ली गई थी। तब क्वीन एलिजाबेथ नंगे पैर अमृतसर के जलियांवाला बाग में शहीदों को नमन करने गई थीं।

गोल्डन टेंपल में इंतजार हो रहा था, क्वीन जलियावालां पहुंच गईं
भारत दौरे पर आईं महारानी एलिजाबेथ 14 अक्टूबर को अमृतसर पहुंची थीं। सुबह 11.30 बजे उनका विशेष विमान अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरा। महारानी का यह पहला और आखिरी अमृतसर दौरा रहा। अमृतसर पहुंचने पर एलिजाबेथ के स्वागत में स्कूली बच्चे तिरंगा लेकर सड़कों के किनारे खड़े थे। कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच महारानी को अमृतसर एयरपोर्ट से सीधे गोल्डन टेंपल पहुंचना था। इसी हिसाब से कार्यक्रम तय किए गए थे।

लोग गोल्डन टेंपल में क्वीन का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनका काफिला अमृतसर एयरपोर्ट से 17 किलोमीटर चलकर 12.10 बजे जलियांवाला बाग के सामने रुका। जलियांवाला बाग में महारानी का स्वागत जलियांवाला बाग ट्रस्ट के तत्कालीन सेक्रेटरी एसके मुखर्जी ने किया। यहां महारानी जूते-मोजे उतारकर शहीदी लाट पर पहुंची और फूल चढ़ाकर शहीदों को नमन किया। उन्होंने शहीदों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा। महारानी करीब 15 मिनट जलियांवाला बाग में रहीं।

पंजाब के CM ने किया गोल्डन टेंपल में स्वागत
जलियांवाला बाग से निकलकर महारानी का काफिला गोल्डन टैंपल पहुंचा। पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गोल्डन टैंपल में महारानी एलिजाबेथ का स्वागत किया। शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता मनजीत सिंह कलकत्ता ने महारानी को गोल्डन टैंपल के बारे में ब्रीफ किया। गुरुघर में माथा टेकने के बाद महारानी गोल्डन टैंपल परिसर में पैदल घूमीं।

इस मौके पर सिख पंथ की ओर से महारानी को गोल्डन टैंपल का सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया। महारानी भी खास तौर पर ब्रिटेन से गोल्डन टैंपल के लिए तोहफा लेकर आई थीं। उन्होंने तत्कालीन CM बादल को कांच का एक फूलदान दिया था। यह फूलदान आज भी गोल्डन टैंपल के म्यूजियम में रखा है।

अमृतसर के गोल्डन टैंपल में क्वीन एलिजाबेथ मोजे पहनकर पहुंची थीं, उनके लिए नियम बदला गया था। इस पर विवाद भी हुआ था।
अमृतसर के गोल्डन टैंपल में क्वीन एलिजाबेथ मोजे पहनकर पहुंची थीं, उनके लिए नियम बदला गया था। इस पर विवाद भी हुआ था।

महारानी के लिए पहली बार बदला नियम
गोल्डन टैंपल में जाने वाले किसी भी व्यक्ति को नंगे पैर ही प्रवेश करने की इजाजत है लेकिन महारानी एलिजाबेथ के लिए पहली बार इस नियम में बदलाव किया गया। उन्हें मोजे पहनकर गोल्डन टैंपल परिसर में आने की स्पेशल परमिशन दी गई। यह परमिशन महारानी के सुरक्षा सलाहकारों के अनुरोध के बाद दी गई। महारानी जब गोल्डन टेंपल पहुंची तो उन्होंने केसरिया रंग की ड्रेस पहनी थी।

गोल्डन टैंपल प्लाजा में पहुंचने के बाद महारानी ने वहां बने जोड़ा घर में जूते तो उतारे, लेकिन सफेद रंग के मोजे पहने रखे। उनके हाथों में भी सफेद रंग के दस्ताने थे। महारानी ने हैट पहन रखी थी। इसको लेकर विवाद भी उठा, लेकिन महारानी को मोजे पहनकर आने की परमिशन दिए जाने पर आज तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अधिकारियों ने कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

14 अक्टूबर 1997 को गोल्डन टेंपल पहुंचीं महारानी एलिजाबेथ। उनके ठीक पीछे खड़े हैं पंजाब के तत्कालीन CM प्रकाश सिंह बादल।
14 अक्टूबर 1997 को गोल्डन टेंपल पहुंचीं महारानी एलिजाबेथ। उनके ठीक पीछे खड़े हैं पंजाब के तत्कालीन CM प्रकाश सिंह बादल।

क्वीन को परंपराओं के बारे में ब्रीफ नहीं किया गया
कुछ लोगों ने उस समय महारानी एलिजाबेथ को गोल्डन टेंपल में मोजे पहनकर आने की अनुमति दिए जाने का विरोध भी किया था। अगर महारानी को गोल्डन टैंपल के नियमों और आस्था के बारे में सही से ब्रीफ किया जाता तो वह नंगे पांव आकर ही माथा टेकतीं, क्योंकि वह जलियांवाला बाग में भी शहीदों को नमन करने के लिए नंगे पांव ही गई थीं। इस मामले में उनके सुरक्षा अधिकारियों ने जो आग्रह किया, उसकी जरूरत नहीं थी।

गोल्डन टैंपल में नंगे पैर आने के नियम की गंभीरता इस उदाहरण से समझी जा सकती है कि वर्ष 2007 में यहां ऑस्ट्रेलियन नागरिक बेवर्ली को सिर्फ इसलिए माथा टेकने से रोक दिया गया, क्योंकि उसने पैरों में डॉक्टर की ओर से दी गई बैंडेज पहन रखी थी। गोल्डन टैंपल परिसर में हर समय मौजूद रहने वाले SGPC टास्क फोर्स के सदस्य श्रद्धालुओं को नंगे पैर रहने और सिर ढंके रखने के लिए लगातार टोकते रहते हैं।