आतंकी हमले का खतरा अभी टला नहीं:पंजाब में और जगहों पर भी छिपी हो सकती है RDX, हैंड ग्रेनेड और टिफिन बम की खेप

अमृतसर7 महीने पहले
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पंजाब में आतंकी हमले का खतरा अभी टला नहीं है। गुरदासपुर पुलिस ने तीन दिनों में 6 हैंड ग्रेनेड, 900 ग्राम RDX और एक टिफिन बम रिकवर किया है। यह सारा सामान एक-एक स्लीपर सेल के लिए था। पंजाब पुलिस के लिए अन्य स्लीपर सेल और उन तक पहुंच चुकी खेप को रिकवर करना बड़ी चुनौती बन रहा है।

तरनतारन पुलिस द्वारा पकड़े गए चार आरोपियों अमृतसर निवासी सुखविंदर सिंह, टांडा निवासी गुरबचन सिंह, राज सिंह व जसमीत सिंह के अलावा गत दिनों SSOC द्वारा पकड़े गए रणजीत सिंह ने ऐसे खुलासे किए हैं, जिसके बाद पुलिस का विधानसभा चुनाव 2022 तक अलर्ट रहना काफी जरूरी है।

पंजाब पुलिस की सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो पंजाब में अभी भी 60 के करीब स्लीपर सेल बाहर घूम रहे हैं, जिनके पास या तो हथियार पहुंच चुके हैं या जल्द उन तक पहुंच सकते हैं। इनका मकसद नए साल, 26 जनवरी और चुनाव से पहले पंजाब के माहौल को खराब करना है।

सूचना है कि 20 के करीब हैंड ग्रेनेड पंजाब में मौजूद हैं, जिन्हें पाकिस्तान में बैठे आतंकियों ने तस्करों की मदद से भेजा है।
सूचना है कि 20 के करीब हैंड ग्रेनेड पंजाब में मौजूद हैं, जिन्हें पाकिस्तान में बैठे आतंकियों ने तस्करों की मदद से भेजा है।

एक बार में 5 से 7 टिफिन बम भेजता है
गुरदासपुर से जो टिफिन बम बरामद हुआ है, वह तीन महीने पहले रिकवर किए गए टिफिन बम से काफी अलग है। एजेंसियों का अनुमान है कि टिफिन बमों की यहां नई खेप भारत पहुंची है। उनमें से एक टिफिन बम और 4 हैंड ग्रेनेड को एक स्लीपर सेल तक पहुंचाने के लिए छिपाया गया था। यह खेप पहले ही पुलिस के हाथ लग गई। ऐसे 5-6 टिफिन बम और भी पंजाब में छिपाए हो सकते हैं।

RDX को टुकड़ों में रखा गया है
पाकिस्तान में बैठे आतंकी कभी भी सिर्फ 900 ग्राम RDX को भारत नहीं भेजेंगे। एजेंसियों को अनुसार, इस खेप को भी पंजाब में 4-5 जगह छिपाकर रखा गया हो सकता है, ताकि स्लीपर सेल इसे उठा सकें और आतंकियों के इशारों पर पंजाब का माहौल खराब कर सकें।

स्लीपर सेल की पहचान सबसे बड़ी चुनौती
पंजाब पुलिस के लिए इस समय की सबसे बड़ी चुनौती स्लीपर सेल की पहचान करना है। पाकिस्तान व विदेश में बैठे आतंकी संगठन अब ISI की मदद से अपने गलत इरादों को अंजाम देना चाहते हैं। ISI की तरह ही अब आतंकी संगठन स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं।

खास बात यह है कि एक स्लीपर सेल को कभी अनुमान नहीं होता कि दूसरा स्लीपर सेल कौन है और क्या कर रहा है। इतना ही नहीं खेप रखने और उठाने वाले को भी एक दूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। खेप रखने वाला लोकेशन भेजता है और विदेश में बैठे आतंकी उसी लोकेशन को खेप उठाने वाले को फारवर्ड कर दते हैं।

तस्कर व आतंकी मिला चुके हैं हाथ
पाकिस्तान और विदेशों में बैठे आतंकी अब तस्करों की मदद ले रहे हैं। बीते दो दशकों से पंजाब के अंदर तस्करों का नेटवर्क काफी तेजी से फैला है, जिसे पुलिस आज तक नहीं तोड़ पाई। गैंगस्टर व तस्कर हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा पाकिस्तान में है और उसी की मदद वहां बैठे आतंकी अब ले रहे हैं। तस्करों के लिए जो नशे की खेप आती है, अब उसके साथ हथियार भी आते हैं। नशे की खेप तस्कर अपने पास रख लेते हैं और हथियार स्लीपर सेल तक पहुंचा दिए जाते हैं।

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