वैक्सीनेशन पर डीसी की सख्ती:अमतृसर में कोरोना टीका न लगवाने वाले 30 फीसदी कर्मचारियों का रुकेगा वेतन, मेडिकल बोर्ड करेगा कारणों की जांच

अमृतसर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डीसी गुरप्रीत सिंह खेहरा। - Dainik Bhaskar
डीसी गुरप्रीत सिंह खेहरा।

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए चल रहे वैक्सीनेशन अभियान को लेकर अमृतसर के उपायुक्त (डीसी) गुरप्रीत सिंह खेहरा सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। उनके वेतन रोकने के आदेश के बाद जिले के करीब 30 फीसदी कर्मचारियों की सैलरी रुक सकती है। वहीं मेडिकल बोर्ड भी बनाया है जो वैक्सीन न लगवाने के संबंध में जारी सर्टिफिकेट और कारणों की भी जांच करेगा।

डीसी ने आदेश जारी कर रखे हैं कि किए हैं कि उन्होंने सिविल सर्जन और सभी विभागों के मुखियों को बुलाकर कर्मचारियों के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट लेने के आदेश दे दिए हैं। अगर किसी कर्मचारी ने दोनों वैक्सीनेशन नहीं लगवाई हैं तो उसका वेतन रोक दिया जाए। राज्य में अमृतसर ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसने वैक्सीनेशन के लिए वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं। डीसी का कहना है कि देश के कई राज्यों, पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और कई देशों में कोविड के केस बढ़ने शुरु हो गए हैं। इसके लिए सतर्कता जरूरी है।

डीसी खेहरा ने हिदायत दी है कि कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए वैक्सीनेशन की आवश्यकता है। जिले में वैक्सीनेशन का 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए घर-घर में संपर्क किया जाए। यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने वैक्सीन नहीं लगवाई है तो इस बार उसका वेतन रोक दिया जाए। डीसी खेहरा के इस आदेश के बाद जिले के सभी 500 डीडीओज को कर्मचारियों की लिस्ट बनाने के लिए कहा गया है।

मेडिकल बोर्ड का होगा गठन

कोरोना वैक्सीन न लगवाने वाले कर्मचारियों के पास एकमात्र विकल्प मेडिकल सर्टिफिकेट है। या तो कर्मचारी को वैक्सीनेशन लगवानी होगी, अगर उसने वैक्सीनेशन नहीं लगवाई है तो इसका कारण बताना होगा। किसी बीमारी के कारण वैक्सीनेशन से रोका गया है तो उसे डॉक्टर से कारण का सर्टिफिकेट लेकर देना होगा। डीसी खेहरा ने इस पर भी सख्ती कर दी है। सिविल सर्जन को एक मेडिकल बोर्ड बनाने के लिए कह दिया है, ताकि आने वाले हर सर्टिफिकेट की जांच की जा सके।

पहली वैक्सीन के बाद दूसरी डोज लेने नहीं पहुंचे

शहर में 25 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पहली डोज तो लगवा ली, लेकिन दूसरी डोज लगवाने नहीं पहुंचे। इनमें सरकारी कर्मचारी भी हैं। पहली डोज लगवाने का दबाव बनाने के लिए सरकार ने ऐलान किया था कि बिना वैक्सीनेशन कोई ऑफिस नहीं आएगा। इसके बाद स्टाफ स्टाफ ने दबाव में पहली डोज लगवा ली थी। लेकिन 20 से 25 प्रतिशत स्टाफ ऐसा है, जिसने दूसरी डोल लगवाई ही नहीं है। वहीं दूसरी तरफ 10 प्रतिशत स्टाफ ऐसा है, जिसने मेडिकल कारणों से कोविड डोज लगवाने से मना कर रखा है। अगर मेडिकल बोर्ड को कारण सही न लगे तो अगले महीने 30 प्रतिशत स्टाफ की सैलरी पर रोक लग सकती है।

खबरें और भी हैं...