HSGPC पर SGPC टकराव की ओर:सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने से इनकार, प्रधान धामी बोले- अभी भी 1925 के एक्ट पर स्टैंड

अमृतसर2 महीने पहले
SGPC की चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में हिस्सा लेते हुए प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी।

हरियाणा के गुरुद्वारा साहिब के प्रबंध के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पास किए गए अलग गुरुद्वारा एक्ट को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने मानने से मना कर दिया है। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ SGPC की तरफ से अंतरिम कमेटी की विशेष बैठक का आयोजन शुक्रवार चंडीगढ़ में किया गया था। SGPC जल्द ही 30 सितंबर को एक और बैठक अमृतसर में बुलाने जा रही है।

SGPC की बैठक में मौजूद सदस्य।
SGPC की बैठक में मौजूद सदस्य।

SGPC के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने जानकारी दी है कि बैठक में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को लेकर मता पास किया गया है। जिसमें सिख गुरुद्वारा एक्ट 2014 को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई मान्यता को मानने से मना करते हैं। उन्होंने कहा कि SGPC सिख गुरद्वारा एक्ट 1925 के तहत है और वे एक्ट वैसा का वैसा ही खड़ा है। जिसमें कोई संशोधन नहीं किया गया। इसका अधिकार सिर्फ केंद्र के पास है।

कांग्रेस, भाजपा और आप तीनों ने तोड़ने का किया प्रयास

एडवोकेट धामी ने कहा कि 2014 में हरियाण की हुड्डा सरकार ने इस एक्ट को लाकर सिखों को तोड़ने का प्रयास किया। 2017 में पंजाब में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हलफिया बयान दिया कि हरियाणा में अलग सिख प्रबंधन होना चाहिए।

छह महीने पहले बनी आम आदमी पार्टी की सरकार ने भी ऐसा ही सुप्रीम कोर्ट में कहा। रही बात केंद्र की, भाजपा सरकार ने भी इसमें पूरी स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 पर संशोधन का अधिकार उनका है। सभी पार्टियों की कोशिश सिर्फ सिखों को तोड़ने की रही।

खालसा पंथ पर हमला है यह

धामी ने कहा कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को मान्यता देना खालसा पंथ पर 1984 से भी बड़ा हमला है। उन्होंने कहा कि 1947 से पहले बने सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 को वास्तविकता में लाने के लिए कई सिखों ने मोर्चे लगाए और जानें भी दी।

1959 में मास्टर तारा सिंह ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से भी तकरार हुई। अंत में प्रधानमंत्री नेहरू ने मान्यता दी थी कि इस एक्ट में किसी भी तरह के संशोधन के लिए इजलास से मान्यता जरूरी है। लेकिन हरियाणा सिख प्रबंधन एक्ट 2014 को बिना सोचे समझे मान्यता दी गई है।

30 सितंबर को सदस्यों की एक और बैठक्

SGPC के प्रधान धामी ने जानकारी दी कि 30 सितंबर को अमृतसर में तेजा सिंह समुद्री हाल में SGPC सदस्यों की बैठक् बुलाई गई है। जहां इस मुद्दे पर खुल कर बातचीत की जाएगी। उन्होंने सभी SGPC सदस्यों को 30 सितंबर को गोल्डन टेंपल पहुंचने के लिए कहा है।

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