दुबई में तरनतारन के युवक की मौत:7 महीने पहले विदेश गया था सरकारी टीचर का इकलौता बेटा, सरबत का भला ट्रस्ट की मदद से 18 दिन बाद भारत लाया गया शव

अमृतसर/तरनतारन2 महीने पहले
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चाहतबीर के शव के पास विलाप करती उसकी मां। - Dainik Bhaskar
चाहतबीर के शव के पास विलाप करती उसकी मां।

परिवार को बेहतर आर्थिक हालात देने का सपना लिए पंजाब से हर साल हजारों युवा विदेश का रुख करते हैं। परिजन सीने पर पत्थर रखकर घर के चिरागों को बेगाने देश भेज कई साल उनके लौटने का इंतजार करते हैं। जरा, सोचिए उन माता-पिता पर क्या गुरजरी होगी, जिनका बेटा उनके पास से हंसता खेलते गया हो और विदेश से लौटता है, तो ताबूत में। तरनतारन के सरहाली कलां में एक ऐसा ही दर्दनाक मामला सामने आया है। गांव का 24 साल का युवक चाहतबीर काम के लिए दिसंबर 2020 को दुबई गया था। 19 जुलाई को उसका शव उसके कमरे में मिला। मृतक चाहतबीर सरकारी अध्यापिका मां का वह इकलौता बेटा था।

पूरी कार्रवाई के बाद और सरबत का भला ट्रस्ट की सहायता से चाहतबीर का शव 18 दिन के बाद उसके परिवार के पास पहुंचा। सरकारी अध्यापिका के तौर पर काम करने वाली मां का वह इकलौता बेटा था। वहीं अध्यापिका के पति की भी कुछ समय पहले मौत हो गई थी। संस्था के मुखी डॉ. एसपी ओबराय ने बताया कि चाहतबीर तरनतारन की सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली अध्यापिका का बेटा है। दिसंबर 2020 को ही वह दुबई गया था ताकि नौकरी करके पैसे कमा सके। 19 जुलाई को उसकी अचानक मौत होने का पता परिवार को लगा।

परिवार में अकेली मां होने के कारण शव को भारत लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भटकने के बाद उन्होंने सरबत का भला ट्रस्ट संस्था से संपर्क किया। जिसके बाद उन्होंने शव को भारत लाने की कोशिशें शुरु कर दी। भारतीय दूतावास से संपर्क साधा गया और 18 दिनों के बाद शव को तरनतारन लाने में सफल हुए हैं।

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