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पराली की आग से प्रदूषण अनलॉक:शहर में लॉकडाउन के 55 दिनों में एयर क्वािलटी इंडेक्स 55 से 60 के बीच रहा, अब 167 के पार

अमृतसर13 दिन पहले
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  • खराब हुई हवा - सेटेलाइट ने जिले में 21 सितंबर के बाद 1111 जगह पराली जलने की रिपोर्ट दी, इसलिए अक्टूबर में 46 प्वाइंट बढ़ा प्रदूषण
  • प्रशासन की टीमें 1008 खेताें में पहुंची, 570 में आग के सबूत नहीं ढूंढ पाईं, 103 जगह का अभी दौरा ही नहीं किया

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी के सख्त निर्देशों के बावजूद किसानों को पराली जलाने से रोकने की प्रशासन की कोशिशें बेकार जा रही हैं। इसी कारण लॉकडाउन के 55 दिनों में इंडस्ट्री व वाहनों की आवाजाही बंद होने समेत दूसरी पाबंदियों के कारण शहर की जो हवा साफ हो गई थी, वह अब खराब स्थिति में पहुंच गई है। लॉकडाउन के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 55-60 से ऊपर नहीं गया। यानी हवा में मामूली प्रदूषण था। इससे लोगों की सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचता था, मगर अब पराली की आग से उठते धुएं ने हवा में प्रदूषण 3 गुणा कर दिया है। हालात ये हंै कि अक्टूबर महीने की 15 तारीख तक एक्यूआई 167 अनहेल्दी लेवल पर पहुंच गया है। ऐसी हवा अस्थमा या फेफड़े के मरीजों के लिए तकलीफदेय होती है।

5 दिन से 167 से नीचे नहीं गया एक्यूआई

अक्टूबर महीने के एक भी दिन हवा बेहतर स्थिति में नहीं पहुंची। 1 अक्टूबर के बाद से एक्यूआई लेवल 122 से कम नहीं हुआ। इसके बाद 15 दिनों में प्रदूषण 46 प्वाइंट बढ़ गया। हालात यह हैं कि पिछले 5 दिन से एक्यूआई लेवल 167 के नीचे नहीं आ रहा।

  • 80 औसत एक्यूआई रहा जून का। इस महीने वाहनों की आवाजाही शुरू हुई, इसके बावजूद हवा मामूली रूप से प्रदूषित हुई।
  • 83 औसत एक्यूआई रहा जुलाई और अगस्त का। बारिश और धूल-भरी तेज हवाएं चलने के बावजूद हवा साफ रही।
  • 110 औसत एक्यूआई रहा सितंबर का। इस महीने इंडस्ट्री खुलने और वाहनों की आवाजाही बढ़ी। फिर भी हवा ‘संतोषजनक’ रही।
  • 361 किसानों को 93 हजार जुर्माना, 329 को रेड एंट्री सूची में डाला

किसानों को पराली जलाने से रोकने में प्रशासन की टीमें फेल हो रही हैं। 21 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच सेटेलाइट ने 1111 जगह आग लगाए जाने की रिपोर्ट दी। इनमें से 1008 स्थानों पर टीमें पहुंची, मगर सिर्फ 438 जगह ही आग के सबूत ढंढ पाई। इनमें से 361 किसानों को प्रशासन ने 93 हजार रुपए जुर्माना लगाया। 35 हजार की वसूली की गई। वहीं 329 किसानों को रेड एंट्री सूची में डाला गया है। 570 मामलों में टीमों को आग लगने के सबूत ही नहीं मिले। 103 अभी तक प्रशासन की टीमें पहुंच ही नहीं पाई।

प्रशासनिक अफसरों की मॉनिटरिंग में खामी

प्रशासनिक अफसरों की मॉनिटरिंग का हाल यह है कि सेटेलाइन ने तो आग लगने की सूचना दी, लेकिन टीमें जब मौके पर पहुंची तो उन्हें 570 जगह पर इसके सबूत ही नहीं मिले।

सिर्फ 4 किसानों पर की एफआईआर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किसानों के खिलाफ मजीठा में 1, अमृतसर 1 अमृतसर-2 में 1 और बाबा बकाला में 1 किसान के खिलाफ वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 के तहत एफआईआर दर्ज की हंै। इन किसानों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चलेगा और दोषी पाए जाने पर सजा होगी।

इंडस्ट्री खुलने से असर कम पड़ा, पराली से ज्यादा: एक्सईएन

लॉकडाउन के बाद इंडस्ट्री खुलने और वाहनों के चलने से एक्यूआई का स्तर जरूर बढ़ा है, लेकिन पराली जलाने से पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुंच रहा है। इससे एक्यूआई लेवल बढ़ा है। बोर्ड और प्रशासन पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। 4 किसानों के खिलाफ वायु प्रदूषण एक्ट के तहत केस भी दर्ज करवाए गए हैं। जहां इंडस्ट्री चल रही है, वहां अलग से टीमें लगाई हैं। -हरपाल सिंह, एक्सईएन, रीजनल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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