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ऑनलाइन सेमिनार:सकारात्मकता और उम्मीद जीने की असली वजह : जॉय

अमृतसर10 महीने पहले
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ऑनलाइन सेशन में मौजूद राइटर। - Dainik Bhaskar
ऑनलाइन सेशन में मौजूद राइटर।
  • देओलीवल्लाह नामक पुस्तक की चर्चा के लिए ऑनलाइन सेमिनार
  • जीवन को आगे बढ़ाना सबसे अच्छा : डिसूजा

जिंदगी में सकारात्मकता और उम्मीद जीने की असली वजह है। अगर इंसान आस छोड़ दे तो वह दिन-ब-दिन खत्म होता जाता है। उक्त बातें देओलीवल्लाह नामक पुस्तक की चर्चा के लिए आयोजित ऑनलाइन सेमिनार के दौरान लेखकों ने श्रोताओं के समक्ष रखीं।

देओलीवल्लाह पुस्तक जॉय मा और दिलीप डिसूजा की ओर से लिखी गई है और इस पुस्तक में जॉय मा ने इंडो-चाइना वार के दौरान चीनी कैंप में जन्म और बिताए अपने बचपन के किस्सों को शेयर किया है।

जीवन को आगे बढ़ाना सबसे अच्छा : डिसूजा

जॉय मा ने कहा कि वह राज्यस्थान के देओली में कैंप में रहे और फिर जिस ट्रेन में गए उस पर एनिमी ट्रेन लिखा था। जो उन्हें बिना कुछ किए कसूरवार ठहरा रहा था। जॉय मा और दिलीप डिसूजा के साथ डिस्कशन में आंचल मल्होत्रा और प्रीति गिल मौजूद थीं।

भारतीय क्या है और क्या भारतीय मुद्दे पर चर्चा की गई। दिलीप डिसूजा ने कहा कि यह सबकुछ किए बिना दुश्मन बनने की एक भयावह कहानी है। छोटे बच्चों को जो वार के दौरान पैदा हुए थे, उन्हें बाहरी लोगों, एलियंस, शत्रुओं के रूप में देखा गया था। यह सामान्य बचपन नहीं था जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं।

हालांकि उनके पास हर समय खेल और सबकुछ था। फिर भी सचेत थे कि वह इस क्षेत्र में प्रतिबंधित हैं। मगर फिर भी आशा के आधार पर जीवन निकल गया। वह सभी अतीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि 50 साल पहले जो हुआ उससे दुखी होने का कोई मतलब नहीं है। मगर जीवन को आगे बढ़ाना सबसे अच्छा है।

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