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डेंगू चरम पर, अस्पतालों में सफाई व्यवस्था नहीं:स्वीपर्स की कमी से जूझ रहे हैं अमृतसर के सरकारी अस्पताल, सकत्री बाग और घनूपुर काले में कोई स्थायी कर्मचारी नहीं

अमृतसर18 दिन पहले
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गुरु नानक देव अस्पताल में फैली गंदगी। - Dainik Bhaskar
गुरु नानक देव अस्पताल में फैली गंदगी।

पंजाब के अमृतसर जिले में डेंगू की बीमारी चरम पर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मरीजों की संख्या 600 के करीब पहुंच चुकी है। लेकिन सेहत सुविधाएं देने के वादे करने वाली सरकार के अस्पताल सफाई सेवकों की कमी से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं सकत्री बाग व घनूपुर काले के सिविल अस्पतालों में एक भी स्थायी कर्मचारी नहीं है। ऐसे में हम सरकारी अस्पतालों की सफाई व्यवस्था का अंजादा लगा सकते हैं।

आरटीआई कार्यकता नरेश जोहर ने सरकारी अस्पतालों में सफाई सेवकों के आंकड़े जानने के लिए आरटीआई डाली। लेकिन सरकार का जवाब हैरान करने वाला था। यूं तो सरकारी अस्पतालों को अर्बन प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटरों का दर्ज दिया जा चुका है। लेकिन सुविधाओं में कोई सुधार नहीं किया गया है। भाई मोहकम सिंह अस्पताल सकत्रीबाग और अस्पताल घनूपुर काले में कोई स्थायी सफाई सेवक नहीं है। इन दोनों ही अस्पतालों में मंगलवार, वीरवार और शनिवार को एक सफाई सेवक आकर सफाई कर जाता है।

शहर के अस्पताल सफाई सेवकों की कमी से जूझ रहे हैं।
शहर के अस्पताल सफाई सेवकों की कमी से जूझ रहे हैं।

अस्पताल रणजीत एवेन्यू में दो सफाई सेवक

रणजीत एवेन्यू के अस्पताल को भी अर्बन प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर का दर्जा दिया जा चुका है। यहां मदर केयर सेंटर के अलावा डेंटल डॉक्टर भी बैठती हैं। यहां नॉर्मल डिलिवरियां भी की जाती हैं। इतना ही नहीं यहां एक्स-रे और कई तरह के टेस्ट भी किए जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद यहां सिर्फ दो सफाई सेवक हैं।

गुरु नानक देव अस्पताल में भी नहीं सफाई सेवकों की कमी

शहर का सबसे बड़ा गुरु नानक देव अस्पताल भी सफाई सेवकों की कमी से जूझ रहा है। कोरोना काल में यहां आऊटसोर्सिंग के तहत सफाई सेवक रखे गए थे। लेकिन उन्हें भी निकाल दिया गया है। जिसके बाद जीएनडीएच की स्थिति एक बार फिर पहले जैसी ही हो चुकी है।

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