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जीएसटी की तीसरी वर्षगांठ:कारोबारियों की मांग, किस्तों में पैमेंट जमा करने का जीएसटी में हो प्रावधान

अमृतसर4 महीने पहले
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  • डेढ़ लाख करदाताओं के बोझ से रुक जाती है साइट
  • वैट-जीएसटी के मैन्युअल रिफंड भी लटके
  • टैक्स माहिरों ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स की बताईं मुश्किलें, जरूरी सुझाव भी दिए

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के तीन साल पूरे होने के बाद भी पोर्टल की समस्याएं हल नहीं हो पाई हैं। इन 36 महीनों में जीएसटी काउंसिल की 40 बैठकें हो चुकी हैं, वहीं 650 के अमेंडमेंट नोटिफिकेशन और 250 सर्कुलर निकाले गए हैं।

करदाताओं और टैक्स माहिरों को मुश्किल आने पर हेल्पलाइन स्टाफ भी खुद को हेल्पलेस बताते हुए संबंधित अफसर से संपर्क करने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है।

जीएसटी प्रैक्टिशनर्स एसो. के पूर्व प्रधान एडवोकेट नवीन सहगल, एडवोकेट रंजीत शर्मा और पूर्व उप प्रधान विकास खन्ना के मुताबिक इन मुश्किलों का हल करने के लिए डिवीजन स्तर पर टेक्निकल टीमें गठित की जानी चाहिए।

टैक्स माहिरों ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स की बताईं मुश्किलें, जरूरी सुझाव भी दिए

}शुरुआत में रिफंड मैन्युअली दिए जाते थे, परस्पर बातचीत से मुश्किलें हल हो जाती थीं। सितंबर 2019 से रिफंड सिस्टम आॅनलाइन होने से पेंडिंग रिफंड की स्थिति क्लीयर नहीं हो पाती।

टैक्स माहिरों के मुताबिक रिफंड का निपटारा डिवीजन स्तर पर होना चाहिए। 31 मार्च 2020 के बाद हुए बदलाव लागू नहीं किए गए। अब वैट और जीएसटी के मैन्युअल रिफंड लटके हैं, जिन पर 60 दिन के बाद ब्याज देना बनता है।

जीएसटी में मनचाहे तरीकों से किसी भी तारीख से संशोधन कर दिए जाते हैं। जबकि यह संशोधन साल के मध्य या वित्तीय वर्ष के शुरुआत में किए जाने से इसका पालन करना आसान रहेगा।

कोरोना के कारण पैमेंटें रुकी हैं। जीएसटी का पूरे भुगतान पर ही रिटर्न फाइल हो पाती है। कारोबारियों को किस्तों में पैमेंट जमा कराने का प्रावधान मिले।

}सरकार ने अब डिफाल्टरों को 500 रुपए प्रति रिटर्न के हिसाब से लेट रिटर्न दाखिल करने की छूट दी है, जबकि इससे पहले कई करदाता रिटर्नों में देरी पर प्रति रिटर्न 10 हजार रुपए भर चुके हैं।

अब खुद को ठगा महसूस कर रहे करदाता रिफंड की मांग कर रहे हैं। टैक्स माहिरों के मुताबिक जीएसटी के सर्वर पर 26 राज्यों, 9 यूटीज और एक सेंट्रल सर्वर (सेंट्रल बोर्ड आॅफ इनजायरेक्ट टैक्स एंड कस्टमस) का बोझ है।

अक्टूबर 2018 के सर्वेक्षण के मुताबिक 1.14 करोड़ जीएसटी करदाता बताए गए थे। वहीं हर साल 38 लाख नए करदाताओं के जुड़ने का हवाला दिया था। सर्वर की कैपेसिटी नहीं बढ़ाने से रिटर्न भरने के अंतिम दिनों में डेढ़ लाख करदाता पहले से रिटर्न दाखिल कर रहे होने का मैसेज आता रहता है। 

हाईकोर्ट ने करदाताओं को 30 जून से पहले ट्रान वन दाखिल करने की राहत दी थी, पर पोर्टल पर आॅप्शन नहीं खोली गई। करदाता आईटीसी नहीं ले पा रहे।

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