कोरोनाकाल की स्थिति:मौत के बाद ‘मोक्ष’ का इंतजार, लोग गंगा प्रवाह के लिए नहीं ले जा रहे अस्थियां

अमृतसर6 महीने पहले
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  • शिवपुरी के अस्थिस्थल में 1 हजार अस्थियां रखने का प्रबंध, कई पोटलियां यहां एक साल से रखी हैं, अब जगह पड़ने लगी कम

कोरोना ने लोगों का जीवन तो संकट में डाल ही रखा है, मगर अब तो मौत के बाद लोगों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने में देरी हो रही है। शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा में अस्थियां प्रवाहित होने तक मरने वाले को मोक्ष नहीं मिलता। कोरोना के कारण पैदा हुए हालात में लोग अपने परिजनों की अस्थियों को हरिद्वार कम ही ले जा पा रहे हैं। इसलिए हाथी गेट स्थित दुर्ग्याणा शिवपुरी के मुक्तिधाम में अस्थियां की पोटलियां बढ़ती जा रही हैं। यहां बनाए गए रैक भर चुके हैं। लोगों को अस्थियों को पीपों, बोरियाें, कपड़े की गठरियों और छोटे मटके में नीचे रखना पड़ रहा है।

पोटलियाें पर जमने लगी धूल

दुर्ग्याणा कमेटी के मुलाजिमों के मुताबिक कई लोग अपने परिजनों की अस्थियां चुनने के एक साल बाद भी उन्हें गंगा में बहाने हरिद्वार नहीं ले गए हैं। कई के पोटलियों पर धूल जम चुकी है। शिवपुरी के अस्थिस्थल में एक हजार से ज्यादा अस्थियां रखने का प्रबंध है, मगर अब अस्थिस्थल छोटा पड़ने लगा है। शिवपुरी में रोजाना 30 के करीब संस्कार हो रहे हैं, जिससे अस्थिस्थल भर चुका है। शिवपुरी के प्रबंधकों के मुताबिक कई ऐसी अस्थियां भी यहां रखी हैं, जिनके पारिवारिक सदस्य खुद कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसलिए वे ठीक होने के बाद ही अस्थियां लेकर विसर्जन करने जा पाएंगे। शहर के अन्य श्मशानघाटों की भी यह स्थिति है। शहीदां साहिब श्मशानघाट के अस्थिस्थल में जगह कम पड़ने लगी है। हालांकि यहां यह स्थित दो-तीन पहले ही बनी है।

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