पंजाब के वरिष्ठ नेता सेवा सिंह सेखवां का निधन:लंबे समय थे बीमार, बेटे ने दी देहांत की जानकारी; डेढ़ महीना पहले केजरीवाल ने जॉइन करवाई थी AAP

अमृतसर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

पंजाब के वरिष्ठ नेता सेवा सिंह सेखवां का बुधवार को देहांत हो गया। उनके बेटे जगरूप सिंह सेखवां ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी साझा की। उसके बाद समर्थक उनके निवास पर इकट्‌ठा होना शुरू हो गए। सेखवां लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीती 26 अगस्त को ही अरविंद केजरीवाल ने उनके गांव पहुंचकर सेवा सिंह सेखवां को आम आदमी पार्टी (AAP) जॉइन करवाई थी। AAP में शामिल होने के बाद वह अधिकतर समय घर पर ही रहे।

अध्यापक से पिता के नक्शे-कदम पर चल बने राजनेता
सेखवां के पिता काजनूवान से 1977 और 1980 में विधायक रहे। 1990 में पिता के देहांत के बाद पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें राजनीति में आने को कहा। 14 साल के अध्यापक की नौकरी को छोड़ सेवा सिंह ने 1997 में पहली बार काहनूवान विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और विधायक बने गए। इसके बाद वह पंजाब के रेवून्यू, पुनर्वास, पब्लिक रिलेशन और शिक्षामंत्री भी रहे।

सुखबीर-मजीठिया से नाराज होकर छोड़ी था अकाली दल
सेवा सिंह सेखवां पहले गुरदासपुर जिले में काहनूवान और उसके बाद कादियां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे। 2017 के चुनाव में वह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के भाई फतेहजंग सिंह बाजवा के सामने हार गए। विधानसभा चुनाव में हुई हार के बाद सेखवां के शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल से मतभेद हो गए।

दरअसल पंजाब के माझा इलाके में किसी समय शिरोमणि अकाली दल के अंदर तीन दिग्गजों- सेवा सिंह सेखवां, रतन सिंह अजनाला और रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा की तूती बोलती थी। इस इलाके में अफसरों की तैनाती से लेकर विकास कार्यों की मंजूरी तक, सारे काम इन्हीं तीनों की सहमति से होते थे लेकिन वर्ष 2012 में अकाली-भाजपा सरकार में बिक्रम सिंह मजीठिया के कैबिनेट मंत्री बनने और उसके बाद सुखबीर बादल को शिरोमणि अकाली दल का प्रधान बनाए जाने के बाद इन तीनों नेताओं का रुतबा कम होने लगा। उस समय सियासी हलकों में बिक्रम सिंह मजीठिया को माझा का नया जरनैल कहा जाता था।

2018 में शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) पार्टी बनाई
2017 के विधानसभा चुनाव में जब शिरोमणि अकाली दल की बुरी तरह हार हुई तो सेखवां, अजनाला और ब्रह्मपुरा ने उसके लिए सुखबीर बादल की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया। तीनों नेता चाहते थे कि हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सुखबीर बादल को पार्टी प्रधान के पद से इस्तीफा देना चाहिए, मगर पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल के आगे तीनों की एक नहीं चली। धीरे-धीरे सेखवां, अजनाला और ब्रह्मपुरा के सुखबीर बादल से मतभेद बढ़ते गए और फिर तीनों ने पार्टी से इस्तीफा देकर 16 दिसंबर 2018 को शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) नाम से नई पार्टी बना ली। हालांकि नई पार्टी कुछ खास नहीं कर पाई। 4 नवंबर 2018 को शिरोमणि अकाली दल से इस्तीफा देने वाले सेखवां सालभर तो राजनीति में सक्रिय रहे मगर उसके बाद उनकी गतिविधियां कम होती चली गईं। 2022 के विधानसभा चुनाव से लगभग 7 महीने पहले अगस्त 2021 में अरविंद केजरीवाल ने उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) जॉइन करवा ली।

खबरें और भी हैं...