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अमृतसर में कल से लंगूर मेला !:मान्यता है कि बड़ा हनुमान मंदिर में मन्नत मांगने से भरती है सूनी गोद, संतान होने पर नवरात्र में उसे लंगूर का बाणा पहनाकर टेका जाता है मत्था

अमृतसर2 महीने पहले
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नवरात्र के साथ ही अमृतसर में गुरुवार से लंगूर मेला शुरू होने जा रहा है। दुर्ग्याणा मंदिर के पास बड़े हनुमान मंदिर में इसका आयोजन किया जा रहा है। दशहरे तक चलने वाले इस मेले में बड़ी संख्या में बच्चे वानर का रूप धारण करके मत्था टेकने पहुंचते हैं। कहा जाता है कि यह प्रथा रामायण काल से चली आ रही है। इस जगह को श्री राम का वरदान मिला हुआ है। कोरोना के चलते इस बार विदेश से बच्चे इस मेले में नहीं पहुंच पाएंगे, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में वानर सेना यहां पहुंच रही है।

बड़ा हनुमान जी के दरबार में बच्चे। फाइल फोटो
बड़ा हनुमान जी के दरबार में बच्चे। फाइल फोटो

मंदिर को लेकर मान्यता है कि लोग यहां संतान को लेकर मन्नत मांगते हैं। जिसके पूरा होने के बाद वो बच्चे को लंगूर की तरह सजाकर इस मेले में लेकर आते हैं। इसके बाद उसे हनुमान जी की वानर सेना में शामिल किया जाता है। मंदिर में कार्यक्रम को लेकर सारी तैयारियां हो चुकी हैं।

इस तरह बाल हनुमान के रूप में पहुंचते हैं बच्चे। फाइल फोटो
इस तरह बाल हनुमान के रूप में पहुंचते हैं बच्चे। फाइल फोटो

60 बजरंगी सेनाएं भी पहुंचेंगी
मंदिर के सेवक और श्री गिरिराज सेवा संघ के प्रधान संजय मेहरा ने बताया कि इस साल 60 बजरंगी सेनाएं यहां मत्था टेकने पहुंचेंगी। रोजाना 4000 से 5000 के करीब बच्चों के परिवार के साथ यहां पहुंचने का अनुमान है। प्रशासन ने सभी से मास्क पहनने की अपील की है।

परिवार के साथ मत्था टेकने पहुंचते हैं बाल हनुमान। फाइल फोटो
परिवार के साथ मत्था टेकने पहुंचते हैं बाल हनुमान। फाइल फोटो

क्या है इस मेले के पीछे की कहानी
बड़ा हनुमान मंदिर में हनुमान जी की बैठी हुई मूर्ति है। यह भी कहा जाता है कि भगवान हनुमान की मूर्ति को लव कुश ने खुद बनाया था। इसी मंदिर में एक वट का वृक्ष भी मौजूद है। जब राम जी की सेना के साथ लव-कुश का युद्ध हुआ था, तो हनुमान जी को इसी वृक्ष से बांधा गया था। बताया जाता है कि अश्वमेध यज्ञ से छोड़े गए घोड़ों को लव-कुश ने पकड़ लिया था, जब हनुमान जी उसे छुड़वाने पहुंचे तो उन्हें लव और कुश ने पेड़ से बांध दिया था।

इसके बाद राम जी यहां उन्हें छुड़ाने पहुंचे थे। उनका लव-कुश से युद्ध हुआ। जिसे सीता जी ने बीच में आकर रोका था। उन्होंने राम जी को बताया कि ये आपके ही बच्चे हैं। यहां पर भगवान राम को उनकी संतानों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था, इसीलिए माना जाता है कि यहां पर जो भी संतान की कामना करता है तो वो जरूर पूरी होती है।

टिफिन बम से निपटने के लिए पुलिस तैयार
त्योहारों के चलते DGP कार्यालय से हाई अलर्ट जारी किया गया है। अमृतसर में लंगूर मेला बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। DCP बंडाल ने बताया कि पूरे परिसर की CCTV से निगरानी रखी जाएगी। पंजाब पुलिस के साथ कमांडो भी तैनात किए जाएंगे। 24 घंटे पुलिस के जवान ड्यूटी देंगे।DCP परमिंदर सिंह बंडाल ने कहा कि लंगूर मेले में सुरक्षा के सभी उचित प्रबंध कर लिए गए हैं। रोजाना तीनों पहर मंदिर की चेकिंग की जाएगी।

रंग बिरंगी लाइटों से सजा दुर्ग्याणा मंदिर।
रंग बिरंगी लाइटों से सजा दुर्ग्याणा मंदिर।

हवाई, सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है अमृतसर
देश के हर कोने से रेल और सड़क मार्ग के माध्यम से अमृतसर पहुंचा जा सकता है। रोजाना दिल्ली से अमृतसर के लिए ट्रेनें और बसें चलती हैं। वहीं देश के बड़े शहर हवाई मार्ग के रास्ते अमृतसर से जुड़े हुए हैं। अमृतसर में श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल हवाई अड्‌डा है, जहां विदेशों से भी लोग डायरेक्ट फ्लाइट लेकर पहुंच सकते हैं।

-रेलवे स्टेशन से दुर्ग्याणा मंदिर 1.90 किलोमीटर दूर है।

-एयरपोर्ट से दुर्ग्याणा मंदिर की दूरी 12.4 किलोमीटर है।

-बस स्टैंड से दुर्ग्याणा मंदिर की दूरी 2.6 किलोमीटर है।

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