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जहरीली शराब:तरनतारन पुलिस रटौल की घटना से सबक लेती तो नहीं होती 110 मौतें

तरनतारन2 महीने पहले
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  • 16 जुलाई को तरनतारन के ही गांव में जहरीली शराब से गई थी 3 जानें

जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए सीधे तौर पर तरनतारन पुलिस की लापरवाही जिम्मेदार है। अगर पुलिस ने 16 जुलाई को तरनतारन के ही रटौल गांव में नकली शराब पीने से 3 लोगों की मौत और एक आदमी की आंखों की रोशनी चले जाने से जुड़े केस को गंभीरता से लिया होता तो 15 दिन बाद 110 लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती।

यही नहीं, रटौल में हुई मौतों के 10 दिन बाद, जहरीली शराब से दोनों आंखों की रोशनी गंवा चुके रविंदर सिंह बिट्टू की शिकायत पर पुलिस ने 27 जुलाई को प्रकाश सिंह उर्फ पाशी नामक शख्स पर केस तो दर्ज किया मगर उसमें न तो तीन लोगों की मौत को लेकर धारा जोड़ी और न ही जांच में गंभीरता बरती। पाशी पर केस दर्ज होने के 3 दिन बाद, 30 जुलाई को मुच्छल गांव से लोगों के मरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह आज तक जारी है।

27 जुलाई को शराब बेचने वाले पाशी पर केस तो दर्ज किया मगर पकड़ा नहीं

रटौल गांव में 16 जुलाई की शाम को प्रकाश सिंह उर्फ पाशी ने मटका लगाकर अवैध देसी शराब बेची थी। इस शराब को पीने से बीएसएफ की नौकरी छोड़कर आए रविंदर सिंह बिट्टू की आंखों की रोशनी चली गई। इसके अलावा रौनक सिंह, जोगिंदर सिंह और सुरजीत नामक युवकों की मौत हो गई। पीड़ित परिवारों ने पुलिस को शिकायत दिए बिना शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।

बाद में मामला मीडिया में उछला तो डीसी कुलवंत सिंह धूरी ने एसडीएम रजनीश अरोड़ा की अगुआई में केस की जांच के लिए टीम बनाई जिसने बिट्टू के बयान दर्ज करवाए। सिटी थाने के प्रभारी अमृतपाल सिंह ने 27 जुलाई को बयान दर्ज कर शराब बेचने वाले पाशी पर धारा 328 के तहत केस दर्ज कर लिया। बिट्टू ने जांच टीम और पुलिस को बताया था कि पाशी अवैध शराब तैयार करने लिए जहरीला केमिकल मिलाता था।

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