लॉकडाउन छूट की राहत बेअसर / एक स्टॉपेज से चल फाइनल स्टॉपेज पर रुकने का नियम और लोगों में कोरोना के डर से नहीं उभर रहा पीआरटीसी

The rule of stopping from a stoppage to the final stoppage and the PRTC is not emerging due to fear of corona in people
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The rule of stopping from a stoppage to the final stoppage and the PRTC is not emerging due to fear of corona in people

  • बरनाला पीआरटीसी डिपो को 8 दिन में 1 लाख रुपए का घाटा
  • एक दिन में ‌25 हजार खर्च कर मात्र 15-16 हजार रुपए की कलेक्शन

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

बरनाला. प्रदेश सरकार द्वारा बसों को 20 मई से फिर से चलाने की इजाजत देने के बाद पीआरटीसी को फायदे की जगह हर रोज मोटा नुकसान उठाना पड़ रहा है। 8 दिन में करीब 1 लाख का घाटा हो चुका है।

इसलिए पीआरटीसी बसें बढ़ाने के निर्णय लेने के विचार में नहीं है। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए बसों में भी बनाए गए सोशल डिस्टेंस का नियम, एक जगह से चलकर सीधे दूसरी डिस्टेंस पर रुकने का नियम और आम लोगों में कोरोना के डर के कारण बसों का इस्तेमाल कम करने के कारण पीआरटीसी को हर रोज मोटा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जिसके चलते हर रोज 9 लाख की कलेक्शन करने वाली पीआरटीसी का बरनाला डिपो एक दिन में करीब 25000 का खर्च कर मात्र 15 से 16000 के कलेक्शन कर रहा है। 

चीफ इंस्पेक्टर बोले 

सरकार ने नियम नहीं बदले तो होगा मोटा घाटा|भूरा सिंह चीफ इंस्पेक्टर ने बताया कि अगर सरकार ने अपने नियम नहीं बदले तो पीआरटीसी मोटे घाटे में चली जाएगी। वीरवार को बरनाला बस स्टैंड से पीआरटीसी की 7 बसें चली, जिनमें से तीन लुधियाना के लिए, दो पटियाला, एक बठिंडा व एक मानसा के लिए चली।

लुधियाना को चलने वाली पहली बस में 19 दूसरे में 26 में तीसरी में 20 लोग सवार थे। वहीं पटियाला के लिए जाने वाली पहली बस में 20 वे दूसरी में सिर्फ 18 लोग सवार थे।

बठिंडा वाली बस में 21 सवारियां व मानसा को जाने वाली बस में मात्र 10 सवारी थी। फाइनल स्टाॅपेजपर ही रुकने सेलोग बसों में जाना ठीक नहीं समझ रहे। अधिकारियों ने बताया कि 7 बसें चलाने से उन्हें हर रोज 24 से 25 हजार का खर्च है, लेकिन कलेक्शन 15 से 18000 की हो रही है।

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