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अव्यवस्था:जिला तो बना पर नहीं स्थापित हो सका खजाना दफ्तर

फाजिल्का15 दिन पहले
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  • फाजिल्का में खजाना दफ्तर न बनने से 5000 से ज्यादा पेंशनरों को अब भी काटने पड़ रहे हैं फिरोजपुर के चक्कर

ढाई दशक लंबे चले संघर्ष के बाद फाजिल्का के जिला बनने के बाद भी खुशी अभी तक अधूरी है, जिले में विकास कार्यों के लिए जारी होने वाले फंडों के लिए खजाना दफ्तर न होने की वजह से अभी भी फिरोजपुर का मुंह ताकना पड़ता है। बता दें कि फाजिल्का जिले में लगभग 5350 पेंशनर हैं जिनमें फाजिल्का ब्लॉक में 2300, अबोहर ब्लॉक में 1200 और जलालाबाद ब्लॉक में 1150 पेंशनर हैं।

इतना ही नहीं अबोहर के पेंशनरों को लगभग 300 किलोमीटर, फाजिल्का के पेंशनरों को लगभग 170 किलोमीटर व जलालाबाद के पेंशनरों को 110 किलोमीटर हर माह आना-जाना पड़ता है। इसके लिए सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फाजिल्का में जिला खजाना दफ्तर स्थापित करने में 10 साल विफल रही सरकार को जब फाजिल्का के पेंशनरों ने अदालत में चुनौती दी तो अदालत से फटकार खाने के बाद 6 महीने का समय खजाना दफ्तर स्टाफ की नियुक्तियां मांगने के बावजूद सरकार नहीं कर पाई। जिले के उपमंडल अबोहर के पेंशनरों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है, उन्हें फिरोजपुर आने-जाने में 200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करना पड़ता है। जो उम्र के लिहाज से तो मुश्किल है ही, उस पर कोरोना संकट में उनके लिए अपने हक प्राप्ति के लिए इतनी जद्दोजहद प्राणघातक साबित हो सकती है।

मांगपत्रों पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया
अब इस मामले में जिला खजाना दफ्तर की लड़ाई लड़ रहे पेंशनरों को सारी आस जिले के डीसी से है, जिन्होंने इस मामले में सारी स्थिति अदालत में इसी माह मुकर्रर पेशी में स्पष्ट करनी है। बता दें कि साल 2011 में फाजिल्का जिला बनाया गया था। इस संबंधी नोटिफिकेशन होते ही 2012 में पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव ओमप्रकाश शर्मा ने जिला खजाना दफ्तर की मांग उठाई। लेकिन मांगपत्रों पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि तत्कालीन डीसी ने तहसील खजाना अधिकारी से यहां जिला खजाना दफ्तर में कितना स्टाफ चाहिए, संबंधी रिक्वायरमेंट भी मांगी थी।

लगातार तीन साल मांग को अनदेखा होते देख पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव ओमप्रकाश शर्मा ने एसोसिएशन की मार्फत आरटीआई के तहत वित्त विभाग से सूचना मांगी, जिसका जवाब ये दिया गया कि यह मामला विचाराधीन है, पदों के सृजन की मांग सरकार से की गई है।

खजाना दफ्तर ही नहीं अनेक कार्यालयों की कमी : डीसी
डीसी अरविंद पाल सिंह संधू ने कहा कि खजाना दफ्तर ही नहीं जिले के कई प्रशासनिक कार्यालयों की कमी है। वह सभी कार्यालयों के यहां स्थापित होने और उनमें पर्याप्त स्टाफ की नियुक्तियों के पक्षधर हैं। मामला हाईकोर्ट में को विचाराधीन है, इसलिए वह इस मामले में आड़े आ रही बाधाओं के बारे मेें स्टडी करने के बाद अपना पक्ष अदालत में रखेंगे।

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