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स्वास्थ्य सेवाएं:कोरोना काल में फाजिल्का के 7 महीनों में 6 सिविल सर्जन बदले

फाजिल्का6 दिन पहले
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  • 9 अक्टूबर को डॉ. कुंदन के पाल बने नए सिविल सर्जन

(संजीव झांब)
कोरोना संक्रमण के चलते सरकार समय-समय पर बढ़िया स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के दावे करती रहती हैं। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग पंजाब द्वारा अप्रत्याशित बदलियों का सिलसिला भी चलता रहता है। इसका सजीव प्रमाण सिविल सर्जन कार्यालय फाजिल्का है। जहां पर कोरोना संक्रमण के दौरान 7 मास के समय में 6 बार सिविल सर्जनों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण किए गए। इससे सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह स्थानांतरण कितना रोगियों के हित में है और कितना नियुक्त होने वाले अधिकारी और कितना स्थानांतरण करने वाले उच्चाधिकारियों/मंत्रियों के हित में है।

फाजिल्का में डॉ. सुरिंदर सिंह की नियुक्ति 28 फरवरी 2020 को बतौर सिविल सर्जन की गई थी लेकिन 2 मास के अल्प समय के उपरांत ही उनका स्थानांतरण कर दिया गया। उसके पश्चात डॉ. हरचंद सिंह सहायक सिविल सर्जन को 4 मई को कार्यवाहक सिविल सर्जन नियुक्त किया गया लेकिन मात्र लगभग 2 सप्ताह पश्चात उनका स्थानांतरण कर दिया गया। इस पर सहायक सिविल सर्जन डॉ. चंद्र मोहन कटारिया को एक बार फिर सिविल सर्जन का कार्यवाहक 20 मई को दिया गया था। 3 माह से तीन समय के उपरांत ही डॉ. एनके अग्रवाल की नियुक्ति 12 अगस्त 2020 को फाजिल्का में की गई थी परंतु 2 सप्ताह में ही उनका स्थानांतरण भी कर दिया गया और 26 अगस्त को डॉ. भूपिंदर कौर को फाजिल्का नियुक्त किया गया। डेढ़ महीना पूरा होने से पहले ही उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया और अब 9 अक्टूबर को एक सप्ताह पूर्व डॉ. कुंदन के पाल ने कोरोना संक्रमण के सातवें महीने में छठे सिविल सर्जन के रूप में कार्यभार संभाला है।

देखना होगा कि अब वह यहां पर कितने समय तक तैनात रहते हैं। उल्लेखनीय है कि फाजिल्का में अब तक तैनात सहायक सिविल सर्जन डॉ. चंद्र मोहन कटारिया को छोड़कर जितने भी सिविल सर्जन नियुक्त किए गए हैं वह सब फाजिल्का क्षेत्र से दूर जिलों के निवासी हैं जिनका यहां रहने के प्रति रुझान नहीं रहता और वह किसी न किसी प्रकार अपने ग्रह जिले के निकट या चंडीगढ़ व स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टरेट के कार्यालय में अपनी नियुक्ति करवाने में सफल हो जाते हैं। हाल ही में नियुक्त किए गए डॉ. कुंदन के पाल भी बठिंडा क्षेत्र से संबंधित हैं तथा इनकी सेवानिवृत्ति को भी एक साल से भी कम का समय रह गया है।

ऐसी स्थिति में ये प्रश्न क्षेत्रवासियों तथा रोगियों के लिए अनुतरित रह जाता है कि जो भी अधिकारी स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यालय का प्रभारी होगा वह मात्र कुछ दिन या कुछ सप्ताह ही यहां पर तैनात रहेंगे तो वह अपना काम कितनी सफलता व सुचारू ढंग से कर पाएंगे और स्वास्थ्य सेवाओं में वांछित सुधार किस हद तक कर पाएंगे अनुतरित रह जाता है। यह स्थिति भी तब है जब पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू स्वयं शिकायत निवारण कमेटी के अध्यक्ष हैं। ऐसे में दीपक तले अंधेरा वाली कहावत ही चरितार्थ होती है।

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