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अबोहर:पद का दुरुपयोग कर गलत एफिडेविट दे परिवार के नाम लिया कर्ज, बैंक के जनरेटर को घर में लगा लॉगबुक में डाला था खर्च

फाजिल्काएक महीने पहले
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द फाजिल्का सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर एक करोड़ रुपए से ज्यादा का दुरुपयोग की शिकायतों पर जांच के बाद थाना सिटी टू पुलिस ने डिसमिस सहायक मैनेजर पर केस दर्ज कर लिया है। बता दें कि पिछले 5-6 साल में बैंक में घाेटाले का चौथा मामला है। इससे पूर्व इन्हीं सुखीजा बंधुओं के खिलाफ, एक पूर्व बैंक मैनेजर पर उसकी मौत के बाद व कुछ अन्य बैंक कर्मचारियों पर मामले दर्ज हो चुके हैं। वो मामले भी लंबित हैं कि फिर से गड़बड़ का मामला आ गया है।

4 साल बैंक प्रबंधन ने एक पूर्व बैंक मैनेजर की गड़बड़ियां सामने आने के बाद मामला दर्ज करवाया था। तब कुछ बैंक कर्मचारी भी विवादों के घेरे में आ गए थे। उस समय इन कर्मचारियों ने गबन किए लाखों रुपए बैंक में वापस जमा भी करवाए थे, जैसा कि बैंक अधिकारी ने भास्कर को बताया। इस बार मामले की जांच डीएसपी राहुल भारद्वाज के अनुसार बैंक प्रबंध निदेशक के बयानों पर मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार तारा एस्टेट कॉलोनी निवासी राजेश सुखीजा द फाजिल्का सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक अबोहर में सहायक मैनेजर थे।

उनके खिलाफ उच्चाधिकारियों को शिकायतें मिली थी कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर गलत कागजात और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर बैंक को एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया है। सीसीबी बठिंडा के मैनेजिंग डायरेक्टर जगदीश सिंह सिद्धू व सीसीबी संगरूर के मैनेजिंग डायरेक्टर हरविंदर सिंह ढिल्लों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने जांच रिपोर्ट पंजाब राज सहकारी बैंक लिमि चंडीगढ़ को भेज दी। इसके बाद द फाजिल्का केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड अबोहर के प्रबंधक ने सीसीबी फाजिल्का के मैनेजर कालू राम भंडारी और सीसीबी फाजिल्का के मैनेजर शामलाल को पड़ताल अफसर नियुक्त किया। जांच में राजेश सुखीजा पर लगाए आरोप सही साबित हुए तो 6 अक्टूबर 2020 को उसे डिसमिस कर दिया गया। उसी रिपोर्ट के आधार पर थाना सिटी टू पुलिस ने राजेश सुखीजा पर मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों को धोखे में रख अलग-अलग ब्रांच से लिया था लोन
रिपोर्ट के अनुसार राजेश सुखीजा ने सहायक मैनेजर के पद पर होने के कारण अपने परिवार के नाम व गलत अंडरटेकिंग (एफिडेविट) देकर बैंक अधिकारियों को धोखे में रखते हुए अलग-अलग ब्रांच से एक ही स्कीम के तहत कर्ज जारी करवाया और कर्ज पॉलिसी के विपरीत बनती लिमिट से अधिक कर्ज जारी करवाया गया।

बैंक के जनरेटर की आज तक नहीं हुई बरामदगी
राजेश ने बैंक के एक जनरेटर को घर में लगवाकर बैंक की संपत्ति को निजी हित के लिए इस्तेमाल किया है जो न तो बैंक को वापस दिया गया और न ही उस जनरेटर की आज तक बरामदगी हुई है। बैंक क्लर्क अमरनाथ ने 20 मार्च 2018 को दर्ज करवाए बयानों में बैंक का जनरेटर राजेश के घर छोड़कर आने की बात कबूली थी। वहीं, राजेश ने 2012 से 2015 तक लॉगबुक में जनरेटर को बैंक में लगा दिखाया है। बिजली कट के नाम पर ही काफी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।

2017 में 42.78 लाख बना दिया था स्टेशनरी का खर्च
रिपोर्ट के अनुसार राजेश सुखीजा ने 2017 में बैंक स्टेशनरी का खर्च 42.78 लाख दर्ज करवाया गया। जो बैंक के ऑडिट विभाग ने 2017 की ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज कर लिया था। 2016 और 2017 के दौरान 17.59 लाख व 20.90 लाख की स्टेशनरी का स्टॉक दो दिन में ही खत्म हो गया। जो बिल्कुल भी न मुमकिन है। सुखीजा द्वारा गलत डिमांड कर फर्जी स्टेशनरी की सप्लाई पाकर बैंक से धोखाधड़ी की है।

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