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रोष:फाजिल्का-फिरोजपुर रूट पर चलीं महज तीन बसें, पहले ही दिन रोडवेज को 3 लाख का घाटा

फाजिल्का18 दिन पहले
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हड़ताल के चलते फाजिल्का के बस स्टैंड पर खड़ी बसें व इधर-उधर परेशान होते यात्री। - Dainik Bhaskar
हड़ताल के चलते फाजिल्का के बस स्टैंड पर खड़ी बसें व इधर-उधर परेशान होते यात्री।
  • पीआरटीसी और पनबस कर्मचारियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल

पंजाब रोडवेज व पनबस कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन व पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों की ओर से सोमवार को अनिश्चतकालीन हड़ताल शुरू की। इस दौरान फाजिल्का-फिरोजपुर रोड पर केवल 3 स्थायी कर्मचारियों द्वारा ही बसें चलाई गईं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फाजिल्का के बस स्टैंड से रोजाना 26 से अधिक बसें दौड़ती हैं तथा लगभग 5 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं, जिससे रोडवेज को 2.5 से 3 लाख रुपए प्रतिदिन की आमदन होती है। केवल 3 बसें चलने से रोडवेज की आमदन घटकर प्रतिदिन 25 से 30 हजार रह गई।

जिससे रोडवेज को रोजाना सवा 2 से पौने 3 लाख का घाटा होगा। इस दौरान यात्रियों को भारी परेशानी हुई। सरकारी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा से महिलाओं को भी वंचित रहना पड़ा।फाजिल्का से सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर, संगरिया, मुक्तसर इत्यादि मार्गों पर जाने वाली बसें सोमवार को नहीं चलीं। बता दें कि फाजिल्का से सबसे ज्यादा बसें फिरोजपुर रूट के लिए चलती हैं। इसके अलावा चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना, बठिडा आदि की तरफ भी बसें दौड़ती हैं।

सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने रेगुलर करने का किया था वादा, जो आज तक नहीं हुआ पूरा

यूनियन प्रितपाल सिंह गिल ने बताया कि लंबे समय से ठेका कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा रहा और वर्करों की जायज मांगें भी पूरी नहीं की जा रहीं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने कोई वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि बसों पर महिलाओं के लिए फ्री सफर की सुविधा देना इस बात का सुबूत है कि सरकार की तरफ से सरकारी खजाने में से कोई सुविधा देने के बजाय वित्तीय बोझ कच्चे कर्मचारियों पर डालने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण कर्मचारी अनिश्चितकालीन समय के लिए हड़ताल पर चले गए हैं।

कर्मचारियों को रेगुलर करने व बराबर काम बराबर वेतन लागू करने की मांग

डिपू प्रधान मनप्रीत सिंह ने कहा कि मुलाजिमों ने जायज मांगों में 10 हजार सरकारी बसें करनी, कच्चे मुलाजिमों को पक्का किया जाए, सुप्रीम कोर्ट का फैसला बराबर काम बराबर वेतन लागू किए जाए, रिपोर्टों की कंडीशन रद्द करके मुलाजिम बहाल किए जाएं आदि मांगों को लेकर उनके द्वारा हड़ताल की गई है। परिवहन मंत्री पंजाब ने पहले 1 जुलाई और फिर 6 अगस्त को मीटिंग में यूनियन को भरोसा दिलाया था कि उसकी समस्याओं को पहली कैबिनेट मीटिंग में हल किया जाएगा। पर 16 और 26 अगस्त को हुई कैबिनेट मीटिंग में कोई हल नहीं हुआ जिस कारण मुलाजिमों को संघर्ष के रास्ते चलना पड़ा।

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