आयोजन:नशे का अड्‌डा बना 120 वर्ष पुराना विरासती दर्जा प्राप्त रघुवर भवन, गिरने की कगार पर

फाजिल्का3 महीने पहले
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पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए समारोहों का आयोजन कर सराकर की ओर से अरबों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन राज्य में नशा थमने का नाम नहीं ले रहा। विधानसभा चुनावों से पूर्व कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने नशे को खत्म करने का वादा किया था। इसके बावजूद पंजाब में अनेकों युवक नशे की भेंट चढ़ चुके हैं। अब भी नशा रूकने का नाम नहीं ले रहा।

पंजाब के सांस्कृतिक, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग की ओर से विरासती दर्जा प्राप्त फाजिल्का की सबसे पुरानी इमारत रघुवर भवन इन दिनों नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। दोपहर व रात के वक्त नशेड़ियों का जमावड़ा लगा होता है। जो रघुवर भवन की इमारत में बैठकर नशा करते हैं।

यहां युवाओं की तरफ से लगाए गए नशे के दर्जनों टीके आम देखे जा सकते हैं। फाजिल्का शहर के उत्तर की तरफ बसे मुहल्ला नईं आबादी इस्लामाबाद के निकट 1901 में निर्मित रघुवर भवन को पंजाब सरकार ने दो अगस्त 2016 को विरासती दर्जा देने की अंतिम प्रकाशन की थी।

जिस तहत रघुवर भवन के लिए 4 कनाल 18 मरले जगह निर्धारित की गई है। रघुवर भवन की इमारत के आसपास नगर सुधार ट्रस्ट की जगह होने की वजह से कई बार निवेदन के बाद यहां खंडहर हो चुकी भवन की इमारत की चारदिवारी बनाई गई, लेकिन विरासती दर्जा प्राप्त करने के पांच साल बाद भी इसकी संभाल की तरफ न तो जिला प्रशासन ने ध्यान दिया है और न ही संबंधित विभाग ने। संभाल नहीं होने के कारण अब यह इमारत नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है।

हेरिटेज का दर्जा दिलाने के लिए एक माह तक लोगों ने किया था आंदोलन
स्थानीय इतिहासकार लछमण दोस्त ने बताया कि रघुवर भवन की इमारत को बचाने और इसे हैरिटेज का दर्जा दिलाने के कारण मौहल्ला नई आबादी इस्लामाबाद, टीचर कालोनी, बस्ती चंदोरा और धींगड़ा कालोनी के अलावा शहर की अनेक समाजसेवी संस्थाओं धरना प्रदर्शन किया था, जो करीब एक माह तक चला, इसके बाद इस इमारत को विरासती दर्जा प्राप्त हुआ।

मगर इसके बाद इस इमारत की तरफ विभाग और जिला प्रशासन ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। इसके चलते इमारत अब खंडहर बन गई है। खंडहर होने की वजह से विरासती दर्जा प्राप्त इस इमारत को देखने वाले पर्यटकों की संख्या काफी कम हो गई है। इमारत किसी भी समय गिर सकती है, इस डर की वजह से आम लोग इमारत के अंदर जाना मुनासिब नहीं समझते।

इमारत के चार कमरे पहले ही गिर चुके हैं
लछमण दोस्त के अनुसार रघुवर भवन की इमारत के चार कमरे पहले गिर चुके हैं। अन्य कमरे भी खंडहर हो चुके हैं और किसी भी समय गिर सकते हैं। मगर इसकी देखभाल के लिए प्रशासन व विभाग की तरफ कोई कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की ओर से रघुवर भवन को मिले विरासती दर्जे का बोर्ड तक नहीं लगाया गया। जिस कारण लोगों को इसकी पूरी जानकारी नहीं है। सरकार व प्रशासन की लापरवाही के चलते जहां यह इमारत खंडहर बनी है। प्रशासन इस इमारत को बचाने व नशेड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करे।

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