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परिजनों व वीर नारियों का किया सम्मान:सारागढ़ी की शौर्यगाथा बलिदान की एक ऐसी अद्वितीय कहानी है जिसकी मिसाल दुनिया भर में नहीं मिलती : कैप्टन अमरिंदर सिंह

फिरोजपुर14 दिन पहले
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रविवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा सारागढ़ी साहिब फिरोजपुर में राज्य स्तरीय समारोह करवाया गया। इसमें मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा भाग लेकर सारागढ़ी के शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि सारागढ़ी का शौर्यगाथा बलिदान की एक ऐसी अद्वितीय कहानी है जिसकी मिसाल दुनिया भर में नहीं मिलती। यह शौर्यगाथा सिख रेजीमेंट के उन 21 शूरवीर सैनिकों की याद दिलाता है, जिन्होंने 12 सितंबर 1897 को सारागढ़ी किले की रक्षा करते हुए 10 हजार पठानों का मुकाबला करते हुए शहादत जाम पिया।

सिख सैनिकों की शहादत को विश्व भर में मान्यता मिली : सोढी
शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट करते हुए खेल एवं युवा मामलों के मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने कहा कि इन सिख सैनिकों की शहादत को विश्व भर में मान्यता मिली है, यहां तक कि महारानी विक्टोरिया ने भी इसको मान्यता दी है और हरेक शहीद को उस समय के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से नवाज़ा गया, जोकि भारत के परमवीर चक्र के बराबर है। राणा सोढी ने सारागढ़ी के बारे में पुस्तिका जारी करते कहा कि इन सैनिकों के बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

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