रेल सुविधा:एक साल बाद पटरी पर दौड़ी फाजिल्का-रेवाड़ी पैसेंजर ट्रेन

मुक्तसर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रेलवे स्टेशन पर गार्ड और चालक का स्वागत करते हुए ब्राह्मण सभा के सदस्य। - Dainik Bhaskar
रेलवे स्टेशन पर गार्ड और चालक का स्वागत करते हुए ब्राह्मण सभा के सदस्य।
  • ब्राह्मण सभा के सदस्यों ने ड्राइवर और गार्ड का फूलमालाएं पहनाकर किया स्वागत, 2.40 बजे मुक्तसर पहुंची ट्रेन

कोरोना के चलते एक वर्ष के लंबे अरसे से बंद फाजिल्का से रेवाड़ी जाने वाली रेलगाड़ी रविवार को फिर से पटड़ी पर दौड़ी। इस रेलगाड़ी के चलने से मुक्तसर शहर वासियों में काफी उत्साह दिखा। आज जब रेवाड़ी से चलकर रेलगाड़ी वाया कोटकपूरा होते हुए 2.40 बजे मुक्तसर के रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो इस दौरान ब्राह्मण सभा के प्रधान दीपकपाल शर्मा की अध्यक्षता में रेलगाड़ी का स्टेशन पहुंचने पर स्वागत किया गया और गाड़ी के ड्राइवर व गार्ड को मालाएं पहनाई वहीं यात्रियों को लड्डू बांटे।

ब्राह्मण सभा के प्रधान दीपकपाल शर्मा ने बताया कि पिछले करीब एक वर्ष से बंद पडी गाड़ी चलने से लोगों को काफी राहत महसूस हो रही है। पहले जिन लोगों को कहीं दूरदराज जाना होता था तो वह बसों में जाते थे। इस दौरान उनके समय व पैसे की भी काफी बर्बादी होती थी परंतु यह गाड़ी चलने से अब समय व पैसे की भी बचत होगी।

स्टेशन मास्टर गगनदीप ने बताया कि पहले जहां लोग रिजर्वेशन करवाकर जाते थे परंतु अब लोगों को रिजर्वेशन करवाने की जरुरत नहीं होगी क्योंकि रेलवे स्टेशन पर टिकट खिड़की खुलने लगी है। उन्होंने बताया कि पहले जहां कोटकपूरा का किराया 10 रुपए था अब बेसिक किराया 30 रुपए कर दिया गया है और फाजिल्का का पहले 30 था अब 60 रुपए हो गया है।

स्टेशन मास्टर को दी रेलगाड़ी चलने की बधाई : प्रदीप कुमार

प्रदीप कुमार वासी फाजिल्का ने बताया कि आज जब सुबह वह फाजिल्का से मुक्तसर आए तो उनका काफी समय खराब हुआ और पैसे भी ज्यादा लगे। पहले जब वह मुक्तसर आते तो पहले उन्हें पन्नीवाला और फिर मुक्तसर आना पड़ता था परंतु अब यह रेलगाडी चलने से उन्हें काफी राहत मिली है।

बसों पर जहां उनका किराया 80 रुपए लगता था परंतु ट्रेन में केवल 30 रुपए ही लगेगा। यात्री सुशील कुमार ने कहा कि उन्हें बहुत खुशी महसूस हो रही है कि लंबे समय के बाद ट्रेन चली है। बसों में काफी परेशानी होती है क्योंकि कभी कभी बसों में तो सीट नहीं मिलती जिसके चलते उन्हें काफी समय तो खड़े होकर ही यात्रा करनी पड़ती है।

खबरें और भी हैं...