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घर की मंजिल नहीं आसान / वीरवार को फोन आया बिहार ट्रेन जाएगी शुक्रवार को बताएंगे, फोन न आने पर मजदूरों ने सोचा ट्रेन निकल गई तो फंस जाएंगे, इसलिए स्टेशन आ गए

I received a call on Thursday, the Bihar train will leave, I will tell you on Friday, if the phone does not come, the workers thought that they would be stuck if the train left, so the station came
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I received a call on Thursday, the Bihar train will leave, I will tell you on Friday, if the phone does not come, the workers thought that they would be stuck if the train left, so the station came

  • स्टेशन पहुंचने पर पता चला कोई ट्रेन नहीं, 25 मजदूर धूप से बचने के लिए स्टेशन में गए तो सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया
  • 44 डिग्री तापमान में दीवार की छांव में काट रहे दिन

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 05:00 AM IST

फिरोजपुर. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से बचाव को लेकर देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच कामकाज के लिए हजारों किलोमीटर दूर से आए प्रवासी मजदूर प्रदेश के विभिन्न जिलों में फंसे हैं।

हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें अपने घरों में भेजने के लिए ट्रेनों की व्यवस्था की गई है मगर अभी भी जिले के 3737 मजदूर अपने घरों को जाने के लिए सरकार की राह देख रहे हैं कि कब उन्हें घर भेजा जाए।

इसी के चलते रविवार को रेलवे स्टेशन पर करीब 25 मजदूर जिनमें कुछ मुक्तसर से व कुछ जीरा के गांव चूचक से ट्रेन चलने की सूचना मिलने के बाद जैसे तैसे रेलवे स्टेशन पहुंचे मगर वहां जाने के बाद पता चला कि अभी वहां से कोई ट्रेन नहीं है।

शनिवार से रेलवे स्टेशन पर पहुंचे मजदूर जब रूकने के लिए रेलवे स्टेशन के अंदर जाने लगे तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया तो मजदूर थक हारकर 44 डिग्री तापमान में रेलवे स्टेशन की दीवार के साथ लगकर छांव में बैठ गए।

घर जाने की आस में जीरा और मुक्तसर से पहुंचे प्रवासी

मुक्तसर से अपने साथियों के साथ शनिवार को छावनी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे बिहार के जिला समस्तीपुर निवासी राजेश जाधव ने कहा कि उन्होंने अप्रैल महीने में रजिस्ट्रेशन करवाया था।

वीरवार को उन्हें एक फोन आया था कि बिहार ट्रेन जाएगी इसलिए तुम्हे शुक्रवार को फोन करेंगे मगर उसके बाद किसी का कोई फोन नहीं आया। जब किसी का फोन नहीं आया तो वह शनिवार को अपने 9 साथियों सहित मुक्तसर से बस में सवार होकर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे जहां से उन्हें स्टेशन में नहीं जाने दिया गया जिसके चलते मजबूर होकर इतनी गर्मी में रेलवे स्टेशन के बाहर बैठे हैं। वहीं जीरा के गांव चूचक विंड में आलू स्टोर पर काम करने वाले सुनील कुमार ने बताया कि उन्हें गांव के एक व्यक्ति ने कहा कि रविवार को बिहार ट्रेन जाएगी जिसके चलते वह शनिवार सायं को वहां पहुंचे थे।

मगर आज पता चला कि यहां से कोई ट्रेन नहीं हैं जिसके चलते उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कम से कम रेलवे प्रशासन को इतना तो करना चाहिए कि इतनी तेज धूप में मजदूरों को रहने के लिए टेंट या कमरे की व्यवस्था कर दें।

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