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गरीब किसानों का हक छीना:6 गांवों की पंचायती जमीन भूमिहीन किसानों को न देकर, जमीनवालों को दे दी, मामला कोर्ट पहुंचा

फिरोजपुर13 दिन पहले
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एडवोकेट एमएल महमी से पंचायती जमीन को लेकर कोर्ट में किए गए केस की कॉपी लेती याचिकाकर्ता।
  • भूमिहीन किसानों ने कई बार विभाग को अवगत कराया लेकिन किसी ने नहीं सुना
  • पंचायती एक्ट के अनुसार जमीन की जुताई के लिए हर साल बोली लगती है
  • जमीन वाले किसान ऊंची बोली लगा ठेका ले लेते हैं

(महेंद्र घणघस) घल्ल खुर्द ब्लॉक के गांव सोढी नगर, कामल वाला, फतू वाला, सकूर, झोक नोद सिंह वाला, प्रताप नगर में पंचायती जमीन काे भूमिहीन किसानाें काे न देकर जिनके पास जमीन है उनकाे देने का मामला सामने आया है। उक्त गांव के भूमिहीन किसानाें ने पंचायती जमीन जाेताई पर देने व गांवों में अन्य सुविधाओं के लिए संबंधित विभागों के पास भी आग्रह किया पर सुनवाई न होने पर अब लोग कोर्ट पहुंच गए हैं।

याचिकाकर्ता वीरपाल, सर्बजीत कौर, पूजा, मनजीत, सुनीता, प्रवीण, गीता, सहा आदि ने बताया कि गांवों में अधिकतर पंचायती जमीन उन किसानों को जाेताई पर दी गई है जिनके पास अपनी जमीन भी है। ऐसे में भूमिहीन किसान कैसे खेती करेगा? इसके अलावा गांवों में सड़कों पर रूडियां लगाई गई है, सफाई न होने के कारण मच्छरों की भरमार है और गांव में लाेगाें काे मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है।

6 गांवों में पंचायती जमीन करीब 50 एकड़
पंचायती जमीन को एक साल के लिए ठेके पर देने की खुली बोली होती है तो जमीन वाले किसान ऊंची बोली देकर जमीन जाेताई के लिए ले लेते हैं। ऐसे में भूमिहीन किसान उनके साथ कंपीटिशन नहीं कर पाते और जमीन लेने से वंचित रह जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पंचायत विभाग का एक प्रतिनिधि भी शामिल होता है।

6 गांवों में करीब 50 एकड़ से अधिक जमीन इसी प्रक्रिया के तहत किसानों को दी गई है जिसके विरोध में किसानों ने कोर्ट का दरबाजा खटखटाया है। डीडीपीओ हरजिंद्र सिंह ने कहा कि अभी इस प्रकार का मामला उनके नोटिस में नहीं है। यदि किसी प्रकार से नियमों को ताक पर रख कर जमीन जोताई पर दी गई है तो कार्रवाई होगी।

पंचायती जमीन का 50% हिस्सा केवल एससी वर्ग को ही दिया जाना चाहिए

कानूनी पैरवी कर रहे एडवोकेट एमएल महमी ने बताया कि उक्त गांवों में पंचायती जमीन की जाेताई को लेकर व लोगों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर उन्होंने डीसी, सरपंंच, बीडीपीओ, डीडीपीओ, पंचायत सचिव, निदेशक पंचायत विभाग सहित सभी संबंधित अथॉरिटी को लीगल नोटिस भेजा गया था जिसका 15 दिन में जबाव देना बनता था पर नोटिस का निर्धारित अवधि में जबाव नहीं आया तो केस कोर्ट में फाइल कर दिया है और उक्त सभी को कोर्ट में पार्टी बनाया गया है।

अब कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होनी है। एडवोकेट एमएल महमी ने बताया कि अब पूरे जिले से पंचायती जमीन की जाेताई का रिकॉर्ड आरटीआई एक्ट के तहत मांगा गया है और उसके बाद जहां जहां भी ऐसे मामले सामने आए जिनमें जमीन वाले किसानों को पंचायती जमीन जाेताई पर दी गई होगी उन सब मामलों को कोर्ट में ले जाया जाएगा। नियम के अनुसार पंचायती जमीन संबंधित गांव के भूमिहीन किसानों को जाेताई पर दी जानी चाहिए और उसमें भी 50 प्रतिशत केवल एससी वर्ग के लोगों को दी जानी चाहिए।

पर बहुत से गांवों की पंचायतें नियमों को ताक पर रख कर जमीन वाले किसानों को ही पंचायती जमीन दे देते हैं। उन्होंने बताया कि इन केसों की मैं अपनी फीस नहीं लूंगा। क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग हक पाने के लिए पैसा नहीं खर्च कर सकते।

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