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माघी मेला:गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में अखंड पाठ शुरू, कल होगा पवित्र स्नान, 15 जनवरी को नगर कीर्तन के साथ होगी मेले की समाप्ति

जसकरन बराड़ | मुक्तसर6 दिन पहले
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  • दरबार सजा; 8 मुख्य गेटों पर सुरक्षा के प्रबंध पुख्ता, लंगर लगाए

विश्व प्रसिद्ध मुक्तसर माघी मेले की शुरुआत मंगलवार काे धार्मिक समागम के साथ रस्मी तौर पर हो गई। 40 मुक्तों की याद में मनाए जाने वाले माघी मेले के संबंध में गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब प्रारंभ हो गए। गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब वह स्थान है, जहां पर सिख इतिहास के अनुसार खिदराने की जंग में शहीद होने वाले 40 सिख जिन्हें इतिहास में 40 मुक्तों के नाम से जाना जाता है, का अंंतिम संस्कार गुरु गोबिंद सिंह ने अपने हाथों से किया था।

12 जनवरी से माघी मेले से संबंधित धार्मिक समागम शुरू हो गए। अखंड पाठ के भोग 14 जनवरी को सुबह 6 बजे डाले जाएंगे, 12, 13 व 14 जनवरी को भाई महा सिंह दीवान हाल में धार्मिक समागम दौरान रागी, ढाडी, कविश्री व सिख प्रचारक संगत को गुरु इतिहास से जोड़ेंगे। माघी मेले से संबंधित श्री दरबार साहिब को सुंदर सजाया गया है। संगत की रिहाइश व लंगर के लिए जहां शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा प्रबंध किए गए हैं। वहीं, विभिन्न क्षेत्रों से पहुंची संगत ने भी लंगर लगाए हुए है। श्री दरबार साहिब के मुख्य 8 गेटों पर सुरक्षा के

सख्त प्रबंध किए गए हैं। बड़ी संख्या में संगत की आमद को देखते श्री दरबार साहिब में विभिन्न सेवा सोसायटियों द्वारा बैरीकेड व संगत के कतारों में अनुशासनमयी तरीके से जाने के लिए विशेष सेवा ड्यूटी लगाई गई है। 14 जनवरी को पवित्र सरोवर में श्रद्धालु स्नान करेंगे। 15 जनवरी को नगर कीर्तन उपरांत मेला माघी की रस्मी समाप्ति होगी। श्री अखंड पाठ साहिब की आरंभता मौके मैनेजर सुमेर सिंह सहित अन्य सिख संगत उपस्थित थे।

घोड़ा मंडी शुरू

मेला माघी के साथ ही गुरुहरसहाय रोड वाली घोड़ा मंडी भी शुरू हो गई है। इस मंडी में पशु मेला ठेकेदारों ने प्रबंध किए हैं। मंडी में पंजाब के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से घोड़े लेकर लोग पहुंचते हैं। मेला माघी की यह पुरातन मंडी होने के कारण बड़ी गिनती में इस मंडी में घोड़ो की खरीदो फरोख्त होती है। यह मंडी लगभग एक सप्ताह चलेगी।

मुक्तसर में 40 मुक्तों की याद में हर साल लगता है माघी मेला

सिख इतिहास के अनुसार भाई महा सिंह की अध्यक्षता में जो 40 सिख आनंदपुर के किले डेरा डालते समय गुरु गोबिंद सिंह जी को बेदावा (पत्र) लिखकर दे आए थे कि आप हमारे गुरु नहीं और हम आपके सिख नहीं। इन 40 सिखों ने बाद में 21 वैसाख 1705 को मुक्तसर जिसे पहले खिदराने के नाम से जाना जाता था, में मुगल हुकूमत के विरुद्ध गुरु गोबिंद सिंह जी से आकर जंग लड़ी व शहीदी प्राप्त की।

इसी जगह पर बेदावा देकर आए भाई महा सिंह व उनके साथियों का गुरु गोबिंद सिंह ने बेदावा फाड़ा व उन्हें सिख धर्म में शामिल कर लिया। इस जगह को टूटी गंढी साहिब के नाम से जाना जाता है। यहीं 40 शहीद सिखों का अंतिम संस्कार गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने हाथों से किया, इस जगह को गुरुद्वारा अंगीठा साहिब के नाम से जाना जाता है। शहीद 40 सिखों को इतिहास में 40 मुक्तों से जाना जाता है।

मनोरंजन मेला भी शुरू

मेला माघी से संबंधित मनोरंजन मेला स्थानीय मलोट रोड की मेला ग्राउंड में शुरू हो चुका है। इस मनोरंजन मेले में बच्चों के झूलों के अलावा सर्किस, जादू शो, मौत का कुंआ व विरासती मेला लोगों की आकर्षक का केन्द्र बना हुआ है। मेले के सुरक्षा प्रबंधों को लेकर अन्य जिलों से पुलिस मुक्तसर में पहुंचनी शुरू हो चुकी है।

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