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एक साथ 3 मौतें:गेहूं में रखने को खरीदी सल्फास निगली, दादी के साथ सोने की जिद्द में बच गई दो बच्चों की जान

मालेरकोटला19 दिन पहलेलेखक: पुनीत गर्ग/नवनीज जैन
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बेटा अदरसजोत चिता को मुखाग्नि देता। - Dainik Bhaskar
बेटा अदरसजोत चिता को मुखाग्नि देता।
  • आर्थिक तंगी के चलते 24 घंटे पहले ही परिवार समेत मरने की कर ली थी तैयारी
  • मरने से पहले फोन से सोशल मीडिया एप और कॉन्टैक्ट लिस्ट को डिलीट किया

परिवार की आर्थिक तंगी के चलते बड़ी बेटी को कनाडा नहीं भेज पाने से दुखी पूर्व फौजी की पत्नी सुखविंदर कौर ने जीवनलीला समाप्त करने का 24 घंटे पहले ही प्लान तैयार कर लिया था। ऐसे में उसने घर के एक ही मोबाइल से सभी सोशल मीडिया के एप को डिलीट कर दिया।

फोन के काॅन्टेक्ट से अधिकतर काॅन्टेक्ट तक डिलीट कर दिए थे। शुक्रवार सुबह सल्फास की गोलियां गेहूं में रखने का बहाना बनाकर बाजार से खरीद लाई थी। किसी को शक न पड़े रात का खाना सभी ने हंसते हुए खाया। सुखविंदर कौर अपनी मां, बड़ी बेटी और दोनों छोटे बच्चों को साथ लेकर कमरे में सोना चाहती थी, परंतु छोटी बेटी तरणजोत कौर और बेटे अदरसजोत सिंह ने दादी कुलजीत कौर के साथ सोने की जिद्द की तो उन्हें छोड़ दिया गया।

ऐसे में दोनों छोटे बच्चे और दादी घर के बरामदे में सो गए थे, जिस कारण छोटे बच्चों की जान बच गई, लेकिन परिवार में अब आमदन का कोई साधन नहीं रहा है। छोटे बच्चों के सिर से मां और पिता दोनों का साया उठ चुका है। ऐसे में दोनों तीन लाश एक साथ देखकर गुमसुम नजर आए।

कभी 40 बीघे के मालिक थे... आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को गांव के छोटे स्कूल में डाला

पहले परिवार के तीनों बच्चे मालेरकोटला के पास अच्छे स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन घर की हालत खराब होने के बाद अब बच्चों को गांव के ही एक छोटे स्कूल में डाल दिया गया था। छोटी बेटी तरणजोत कौर 8वीं और अदरसजोत सिंह 7वीं कक्षा में पढ़ता है। दादी को अब न सिर्फ बच्चों की परवरिश की चिंता है, बल्कि घर का गुजारा कैसे होगा, यह भी पता नहीं है।

गौर हो कि पूर्व फौजी गुरप्रीत सिंह के पिता काम तेजिंदर सिंह काफी दयालु थे। बताया गया है कि उनके पास 40 बीघे जमीन थी। पूरे जमीन उन्होंने लोगों की सेवा करते बेच दी। वर्तमान समय में परिवार के पास कोई जमीन नहीं है। सरपंच गुरलवलीन सिंह ने पंजाब सरकार से सहायता की मांग की है। उधर, डीसी रामवीर ने भरोसा दिलाया कि इन लोगों की पेंशन नहीं है तो पेंशन लगाई जाएगी व दोनों बच्चों की पढ़ाई मुफ्त करवाई जाएगी।

सुखविंदर कौर को 2008 में मिली थी नंबरदारी

मृतका सुखविंदर कौर को 2008 में नंबरदारी मिली थी। वह पंजाब की पहली महिला नंबरदार बनी थी। उन्होंने अधिक समय नहीं दे पाने के कारण 2015 में नंबरदारी की पॉवर रिश्तेदार जगदेव सिंह को सौंप दी थी। सुखविंदर की मां हरमेल कौर बीमार और बेसहारा होने के कारण सुखविंदर कौर के पास ही रहती थी।

छोटे बेटे अदरसजोत ने दी तीनों को मुखाग्नि

घटना से पूरे ही गांव कुठाला में शोक की लहर है। शनिवार की सुबह तीनों लाशों को मालेरकोटला के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका पोस्टमार्टम करने के बाद लाशों को सीधा गांव के श्मशानघाट ले जाया गया। जहां शनिवार शाम 4 बजे रीति रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, छोटे बेटे अदरसजोत ने तीनों को मुखाग्नि दी।

बिना ट्यूशन अमनजोत ने पास की थी आइलेट्स

मृतका बड़ी बेटी अमनजोत कौर काफी होनहार थी। शिक्षा में भी काफी तेज थी। गांव के सरपंच गुरलवलीन सिंह ने बताया कि अमनजोत कौर ने आइलेट्स के लिए किसी तरह की ट्यूशन नहीं ली। स्कूली शिक्षा के बीच ही आइलेट्स का ज्ञान भी प्राप्त करती रही। पहली बार में ही आइलेट्स में 7 बैंड हासिल कर लिए थे।

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