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  • Congress Had Won Only One Seat In The 2015 Elections, This Time A Gain Of 19, The Claim Of Being Made Mayor With The Support Of Azad.

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मेयर किसका:कांग्रेस 2015 के चुनाव में मात्र एक सीट ही जीत पाई थी, इस बार 19 का फायदा, आजाद के समर्थन से मेयर बनाने का किया जा रहा दावा

मोगा15 दिन पहले
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  • अकाली दल ने पिछली बार 25 सीटों से चुनाव जीता था, इस बार 10 सीटों का नुकसान हुआ

बुधवार को घोषित नगर निगम मोगा के चुनाव परिणाम में जहां किसी भी राजनीतिक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, वहीं मोगा में शुरू से ही आजाद उम्मीदवार भी ज्यादा संख्या में जीतते आए हैं। बेशक इस बार कांग्रेस को 50 में से 20 सीटें ही हाथ लगी हैं परंतु 10 आजाद उम्मीदवार भी कांग्रेस पार्टी से संबंधित हैं, जो जीत दर्ज करा चुके हैं। ऐसे में आने वाला हाउस कांग्रेस ही बनाएगी और मेयर कांग्रेस का होगा ऐसा दावा

किया जा रहा है।कांग्रेस 2015 के चुनाव में मात्र एक सीट ही जीत पाई थी, इस बार उसे 19 सीट का फायदा हुआ है, वहीं अकाली दल पिछली बार 25 सीटों से चुनाव जीता था और इस बार उसे 10 सीटों का नुकसान हुआ है और वह 15 सीटों से जात दर्ज करा पाया है। वहीं आदमी पार्टी ने निगम चुनाव पहली बार लड़ा है और वह 4 सीटों पर जीत दर्ज कराने में सफल हुई है। भाजपा एक ही सीट पर अपनी इज्जत बचा पाई है। उसे

पिछले चुनाव के मुकाबले 6 सीटों का नुकसान हुआ है। भाजपा पिछली बार 2015 में 7 सीटों से जीती थी। अब मोगा निगम का मेयर कांग्रेस का बनाने का दावा किया जा रहा लेकिन मेयर का ताज किसके सिर पर सजेगा इसका फैसला सरकार द्वारा घोषित किए जाने वाले रोस्टर पर निर्भर करेगा।

कांग्रेस विधायक और शिअद को लगे जोरदार झटके -शहर में चर्चा रही कि विधायक हरजोत अपनी धर्मपत्नी राजिंदर कौर को निगम का मेयर बनाना चाहते थे, जिसके तहत उसे चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन उसे मिली पराजय के चलते विधायक को जोरदार झटका लगने समेत राजनीतिक साख पर असर पड़ा है। वहीं शिअद से मेयर पद के दावेदार व अब तक अपराजित चले आ रहे प्रेम चंद चक्की वाला को पराजय का सामना करना पड़ा। वहीं शिअद से कांग्रेस में आए गुरमिंदरजीत सिंह बबलू व शिअद छोड़ कांग्रेस का दामन थामने वाले प्रमुख समाज सेवी नवीन सिंगला की धर्मपत्नी अंजू सिंगला को पराजय का सामना करना पड़ा।

विरोधी पक्ष रहेगा मजबूत -इस बार विरोधी पक्ष भी मजबूत रहेगा, जिससे स्वस्थ्य लोकतंत्र रहेगा। पिछली बार 25 अकाली दल के पार्षदों को 17 आजाद उम्मीदवारों के मिल जाने से शिअद की ताकत 42 की हो गई थी और 7 भाजपा के मिलाकर 49 हो गए थे विरोधी कांग्रेस का एक ही पार्षद था। जबकि इस बार शिरोमणि अकाली दल के 15, आप के 4 व भाजपा भी इस बार विरोधी दल में है का एक मिला कर 20 विरोधी फ्रंट के पार्षद भी हाउस में अपनी बात रखेंगे।

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