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खेतीबाड़ी के हाल:डीसी ने खुद ट्रैक्टर चला धान की सीधी बिजाई का कराया ट्रायल

फरीदकोट6 दिन पहले
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  • 1 से 15 जून तक है धान की सीधी बिजाई का उपयुक्त समय, 21 दिनों के बाद पानी लगाएं

धान की सीधी बिजाई से जहां पानी की बचत होगी, वहीं किसानों को पनीरी से होने वाली धान की रोपाई के लिए होती लेबर की समस्या से भी निजात मिलेगी। उक्त बातें डिप्टी कमिश्नर फरीदकोट विमल कुमार सेतिया ने गांव चाहल में चल रहे धान की सीधी बुआई के ट्रायल के निरीक्षण के दौरान कही।

इस दौरान उन्होंने किसानों को उत्साहित करने के उद्देश्य से गुरविन्दर सिंह और हरमीत सिंह के खेतों में खुद ट्रेक्टर चलाकर सीधी बुआई का ट्रायल करवाया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से जहां भूजल की बचत होगी वहीं लेबर खर्च की बचत होने से किसानों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा व खेतों को पानी से भर कर जुताई का खर्चा भी बचेगा।

उन्होंने किसानों को पर्यावरण के प्रति जागृत होने को उत्साहित करते हुए कहा कि प्राकृतिक साधनों के अंधाधुन्ध दुरुपयोग ने कुदरती संसाधनों का बड़ा नुकसान किया है। यदि सभी किसानों की तरफ से सीधी बीजाई को प्राथमिकता दी जाए तो भूजल स्तर में सुधार आने की संभावना काफी बढ़ जाएगी क्योंकि इस विधि से बीजाई किए गए धान में पानी की जरूरत पारंपरिक तकनीक की अपेक्षा कम होती है। मुख्य जिला कृषि अधिकारी डाॅ. बलविन्दर सिंह ने बताया कि धान की परमल किस्म की सीधी बीजाई का उपयुक्त समय 1 जून से 15 जून तक और बासमती किस्म की बीजाई का उपयुक्त समय 16 जून से 30 जून तक है। धान की सीधी बीजाई के बाद पहला पानी 21 दिनों बाद लगाया जाए जिससे धान के पौधे की जड़ अपनी ताकत बना सकें।

बिजाई से पहले करें शोधन

आत्मा के प्रभारी डाॅ. अमनदीप केशव ने बताया कि धान की कम समय लेने वाली किस्में पी. आर. 121, पी. आर. 122, पी. आर. 124, पी. आर. 126, पी. आर. 127, पी. आर. 128, पी. आर. 129 और पी. आर. 114 आदि की बीजाई करें। धान की सीधी बीजाई से पहले धान के 8 किलोग्राम बीज को 8 से 10 घंटे पानी में भिगोकर गीली बोरियों पर बिछा कर शोधन के लिए 24 ग्राम सपरिंट 75 डब्ल्यू. एस दवा को 80 से 100 मिलिलीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर बीज को अच्छी तरह मसल दें, फिर बीजाई की जाए।

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