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राजनीति:चुनाव आयोग के अधिकारी को कोराेना, हाईकोर्ट में रिट और चल रहे किसान आंदोलन से टलेंगे निकाय चुनाव

मोगाएक महीने पहले
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  • हाईकोर्ट ने अकाली दल की रिट पर अब भी नहीं दिया स्टे, मोगा नगर निगम को वार्डों में फेरबदल करने का मिला समय

पंजाब में निकाय चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की इच्छा पूरी होती नजर नहीं आ रही, क्योंकि चीफ इलेक्शन कमिशन आफ इंडिया (सीईसीओआई) के एक अधिकारी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने से यह कार्यालय तय समयावधि के लिए बंद किया गया है।

दूसरा अकाली दल द्वारा हो हाईकोर्ट में रिट लगाई गई है, उसकी अगली तारीख 15 दिसंबर पड़ गई है और तीसरा व अहम कारण 3 खेती अध्यादेश को लेकर किसान आंदोलन पर है, जो पंजाब का सब से बड़ा वोट बैंक है। ऐसे में निकाय चुनाव अगले वर्ष के पहले या दूसरे महीने में ही संभव हैं।

मोगा समेत 2-3 जिलों से अकाली दल ने वार्डबंदी में फेरबदल को रोकने की मंशा से हाईकोर्ट में रिट लगाने से यह चुनाव लटक सकते हैं और ठीक ऐसा ही हो रहा है। अब किसान आंदोलन की तरफ भी पंजाब सरकार का ध्यान रहेगा और सरकार चुनाव भूल जाएगी। अकाली दल का कहना है कि गत 5 वर्षों में देश में कोई नई जनगणना नहीं हुई। ऐसे में वार्डबंदी में कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती। अकाली दल के पंजाब हेल्थ कार्पोरेशन के पूर्व चेयरमैन बरजिंदर सिंह बराड़ का कहना है कि हमें कानून पर भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि हाईकोर्ट से उन्हें इंसाफ जरुर मिलेगा। इस मामले में कांग्रेस विधायक डॉ. हरजोत कमल का कहना है कि सरकार ने तो वार्डबंदी को लेकर कोई आदेश दिया ही नहीं है। पांच साल पहले अकाली-भाजपा के कार्यकाल में जो गलतियां की हैं, उसको तो ठीक किया जाना चाहिए। एक वार्ड में 730 वोट, दूसरे में 3300 ये सब गलत है। ये गलतियां ठीक होनी चाहिए।

जिन वार्डों में नियम के खिलाफ सीमाओं को लांघा गया है, वह भी ठीक होनी चाहिए। किसी वार्ड के कटने या बढ़ने से वोटर की मानसिकता नहीं बदलेगी। जिन लोगों को जिसे वोट डालना है उसे ही डालेगा, वार्ड बदलने से वह पार्टी नहीं बदलेगा। ऐसे में अकाली दल को आपत्ति क्यों है।

अकाली दल की दायर रिट पर सुनवाई की अगली तारीख 15 दिसंबर

निकाय चुनाव से पहले सत्ताधारी पार्टियां अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए वार्डबंदी को अपना हिसाब से कराती आ रही हैं। ऐसे में अब फिर नगर निगम अधिकारी वार्डबंदी में फेरबदल में लगे हुए थे। शिअद नेताओं को जब इसकी भनक लगी तो शिअद के सीनियर नेता व पूर्व कृषि मंत्री के बेटे बरजिंदर सिंह बराड़ ने निगम अधिकारियों से इसके नोटिस की प्रति मांगी।

नहीं मिलने पर बरजिंदर सिंह बराड़ ने हाईकोर्ट में यह पली लेते हुए रिट दायर कर दी कि गत 5 वर्षों में नई जनगणना नहीं हुई है। इसलिये म्युनिसिपल एक्ट अनुसार नई वार्डबंदी नहीं हो सकती। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र से जनगणना संबंधी पूछने के साथ-साथ पंजाब सरकार व निकाय विभाग को जबाव दायर करने के लिये 9 सितंबर की तारीख दी थी, परंतु स्टे नहीं दिया था।

9 सितंबर को मोगा नगर निगम की ओर से 117 पन्नों का जवाब दायर करते कहा था कि वो वार्डबंदी को तोड़ नहीं रहे। जो गलत व नियमों के उल्ट वार्ड बने हैं या जिनमें वोटरों की संख्या अन्य वार्डों की अपेक्षा बहुत ज्यादा है, वहां वोटरों की संख्या संतुलित कर रहे हैं। फिर कोर्ट ने 18 सितंबर तारीख दी थी। इस दिन भी अकाली दल को स्टे नहीं मिला और कोर्ट ने अगली तारीख 15 दिसंबर की तय कर दी है। {दीपावली से पूर्व निकाय चुनाव कराने की सीएम की इच्छा नहीं होगी पूरी {चुनाव अगले वर्ष के पहले या दूसरे महीने में होने की संभावना

किसानों के आंदोलन से राजनीतिक हित साधने में लगेगी पंजाब सरकार

राजनीती विश्लेषण व राजनीति के प्रोफेसर सुरजीत सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट में रिट के निपटारे तक सरकार निकाय चुनाव नहीं करा सकती और अब पंजाब सरकार किसानों के आंदोलन से अपने राजनीतिक हित साधने में लगेगी। ऐसे में रिट आड़े न भी आती तो भी पंजाब सरकार चुनाव के विचार को एक तरफ रख किसानों के आंदोलन में खुद को आगे रखने में व्यस्त हो जाएगी और ऐसे में अगले वर्ष फरवरी या मार्च को ही निकाय चुनाव होने की संभावना बन रही है।

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