ठगी के मामले में इंसाफ की गुहार:दो साल पहले ठगी के शिकार हुए खाद्य आपूर्ति विभाग के रिटायर्ड इंस्पेक्टर की नहीं हो रही सुनवाई

मोगा2 महीने पहले
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जानकारी देते इकबाल सिंह। - Dainik Bhaskar
जानकारी देते इकबाल सिंह।
  • मुख्यमंत्री, डीजीपी, साइबर सैल को पत्र लिखकर लगा चुके हैं गुहार

दो साल एक महीना पहले पुलिस को लिखित शिकायत देकर अपने साथ हुई ठगी के मामले में इंसाफ की गुहार लगाने वाला 72 साल के बुजुर्ग व्यक्ति की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। इतना समय बीतने पर भी पुलिस द्वारा शिकायत के आधार पर केस दर्ज नही किया गया है। जिला पुलिस की कार्यशैली को देखते हुए ठगी का शिकार हुए व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री, डीजीपी, साइबर सैल चंड़ीगढ़ व एसएसपी मोगा को पत्र निकालकर इंसाफ की गुहार लगाते हुए ठगी मारने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन मुख् यमंत्री से लेकर पुलिस के बड़े अधिकारियों तक फरियाद करने के बावजूद उसके मामले में कोई सुनवाई नही हो रही है।

बंसत नगर निवासी रिटायर्ड खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर इकबाल सिंह ने चार नबंवर 2019 को एसएसपी को लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि वह 12 साल पहले विभाग से रिटायर्ड हो चुका था। उसके मोबाइल नंबर पर तीन नबंवर 2017 को मैसेज आया कि उनका मैगा लक्की डरा साढे 12 लाख रुपये का निकाला है। बाद में उक्त लोगों ने उसे फोन पर कहा कि वह नकद राशि लेंगे या स्कार्पियों गाड़ी लेना पसंद करेगें।

इस पर उसने कहा कि वह बुजुर्ग़ है। वह गाड़ी नही नकद राशि लेगा। इसके बाद उसे कहा कि नकद राशि लेने के लिए उसे खाते में 6500 रुपये जमा करवाने होगें। इस पर उसने तीन नबंवर 2017 को पंजाब नैशनल बैंक से सुधीर शर्मा के खाते में 6500 रुपये जमा करवा दिए थे। इसके बाद और रुपयों की मांग शुरू कर दी। उन्होंने बीमा प्लान समझाया कि आप बुजुर्ग है। अगर वह उनसे बीमा करवाता है तो हर महीने 15 से 20 हजार रुपये उसे मिलेंगे। एक तरह से पेंशन लग जाएगी। ऐसे में नबंवर 2017 में 13 बार उनके खाते में रुपये जमा करवाए जोकि तीन लाख 18 हजार 500 रुपये बनाता है। इसी तरह तीन नवंबर 2017 से लेकर 18 अक्तूबर 2019 तक कुल 65 लाख रुपये ठग लिए।

पंजाब नेशनल बैंक के खाते से 53 लाख 74 हजार, दो सो रुपये , जबकि स्टेट बैंक आफ इंडिया 27 खातों में 11 लाख दस हजार 601 रुपये जमा करवाए गए है। साइबर सैल के डीएसपी सुखविंदर सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों को सौंपी गई थी। उसके बाद सरकारी वकील को फाइल भेजी गई।

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