आस:रुपिंदर पाल हॉकी ओलंपिक टीम में चयनित, परिवार को स्वर्ण की उम्मीद

फरीदकोट4 महीने पहलेलेखक: परविंदर अरोड़ा
  • कॉपी लिंक

23 जुलाई 2021 से जापान में होने जा रहे 32वें ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले रही भारतीय हाॅकी टीम में फरीदकोट के युवा खिलाड़ी रुपिंदर पाल सिंह के चयन पर फरीदकोट के बाबा फरीद नगर में रहते रुपिंदर पाल सिंह के परिजनों व जिले के खेल प्रेमियों ने प्रसन्नता जताते हुए इस बार भारतीय हाॅकी टीम के ओलंपिक का स्वर्ण पदक जीत कर लाने की आशा जताई है।

ज्ञात रहे कि वर्ष 2011 से भारत की सीनियर राष्ट्रीय हाॅकी टीम का हिस्सा रहे रुपिंदर पाल सिंह इससे पहले अगस्त 2016 में ब्राजील में हुई 31वीं ओलंपिक खेल में भी भारतीय टीम का हिस्सा बन अपनी प्रतिभा के जौहर दिखा चुके हैं। रुपिंदर पाल सिंह के सबसे बड़े मार्गदर्शक व प्रेरणास्रोत रहे फरीदकोट के बाबा फरीद एवेन्यू वासी व कई वर्ष पहले फरीदकोट के बरजिंदरा काॅलेज के पास स्पोर्ट्स गुड्स की दुकान करते पिता हरिंदर सिंह ने बताया कि स्कूल व काॅलेज के समय से ही वह भी हाकी खेलते थे।

इसके अलावा फिरोजपुर रहते देश के प्रसिद्ध हाकी ओलंपियन परिवार के सदस्य हरमीत सिंह, अजीत सिंह व गगन अजीत सिंह के साथ भी उनकी नजदीकी रिश्तेदारी थी। उनका भी सपना था कि उनके परिवार का कोई सदस्य इन रिश्तेदारों के नक्शे कदम पर चलते हुए तरक्की कर उनके परिवार का नाम रोशन करे। इसी प्रेरणा व उनके हाकी के साथ प्रेम ने उन्हें अपने बेटे को हाकी की ऊंचाइयों पर देखने का सपना दिखाया व बेटे ने सच कर दिखाया।

फिरोजपुर में हाॅकी स्टिक थामने की कला सीखी
हरिंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 1996 के दौरान कुछ पारिवारिक कारणों के चलते वह भी परिवार समेत फरीदकोट छोड़ फिरोजपुर रहने के लिए चले गए। जहां उन दिनों शेर शाह वली में हाकी अकेडमी की स्थापना हुई थी। हाकी के प्रति प्रेम रुपिंदर को बचपन से ही था और छह वर्ष की आयु में उन्होंने उसे इस हाकी एकेडमी में प्रशिक्षण दिलवाना शुरू कर दिया। करीब छह वर्ष तक यहां मिले प्रशिक्षण ने उसमें हाकी के किसी मंजे हुए खिलाड़ी के गुण पैदा किए। वर्ष 2002 में उसका चयन चंडीगढ़ स्थित राज्य हाकी अकेडमी में हो गया। इसी दौरान जिला व राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा के बल पर 2006 में उसका चयन पहले राष्ट्रीय हाकी की जूनियर टीम में व वर्ष 2010 में देश की सीनियर टीम के लिए हो गया। यहां से उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

इस बार टीम के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद
रुपिदर पाल सिंह के चयन पर भावुक हुई उसकी माता सुखविंदर कौर ने कहा कि पिछले ओलंपिक में पदक न लाने का उन्हें मलाल है लेकिन इस बार उन्हें पूरा यकीन है कि रुपिंदर व उनके टीम के साथी सर्वश्रेष्ठ खेल का प्रदर्शन करते हुए इस बार ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत कर लाएंगे। उनके चयन के बाद उनके घर पर उपस्थित हाकी कोच व पूर्व जिला खेल अधिकारी हरबंस सिंह ने माना कि इस बार चयनकर्ताओं ने काफी सोच समझ के साथ टीम का चयन किया है। उन्हें पूरा यकीन है कि इस बार टीम का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

हाॅकी में प्रदर्शन

  • 2010 में सीनियर भारतीय हाकी टीम का हिस्सा बनने के बाद मई 2010 में भारतीय हाकी टीम ने मलेशिया के शहर इपोह में हुए 19 वें सुल्तान अजलान शाह कप में हिस्सा लिया व इस टूर्नामेंट में भारतीय हाकी टीम स्वर्ण पदक जीत कर लाई।
  • 2011 में चीन के शहर ओरदोस में हुई एशियन चैंपियंस ट्राफी हाकी टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली व इसी वर्ष हुए सुल्तान अजलान शाह हाकी कप में हिस्सा लेने वाली टीम में शामिल रुपिंदर ने अपनी खेल प्रतिभा से खेल प्रेमियों का दिल जीता।
  • रुपिंदर पाल सिंह दिसंबर 2012 में दोहा कतर में हुई दूसरी एशियन चैम्पियन ट्राफी में रजत पदक जीतने वाली, अगस्त 2013 में मलेशिया में हुए एशियन कप में रजत पदक जीतने वाली, 2014 में ग्लासगो स्काटलैंड में हुई 20वें कामनवेल्थ खेलों में रजत पदक जीतने वाली, अक्टूबर 2014 में कोरिया में हुई 17 वें एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रहे। इसी दौरान खेलते समय चोट लगने से रुपिंदर करीब एक वर्ष तक हाकी नहीं खेल सके।
  • दिसंबर 2016 में अंतर्राष्ट्रीय खेलों में वापसी करते हुए वह हीरो वर्ल्ड लीक हाकी के फाइनल में पहुंची टीम का हिस्सा रहे व इस टीम ने इन खेलों में कांस्य पदक जीता।
खबरें और भी हैं...