तबादला:रेत माफिया पर शिकंजा कसने वाले एसएसपी निंबले का 2 माह में ट्रांसफर

मोगा2 महीने पहले
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  • सुरिंदर जीत सिंह मंड होंगे नए एसएसपी

15 अगस्त के बाद मोगा के एसएसपी का पदभार संभालने वाले युवा एसएसपी ध्रुवन एच. निंबले ने 2 महीने में ही रेत माफिया को नकेल कस दी थी। उनकी सख्ती व जांच में डीएसपी धर्मकोट, माइनिंग अधिकारी व दो सत्ताधारी नेताओं की गर्दन फंसने जा रही थी परंतु एसएसपी निंबले की रिपोर्ट पर कार्रवाई होने से पहले ही उनका तबादला हो गया।

यही नहीं उन्होंने नशे का कारोबार करने वालों पर भी सख्ती की। पुलिस के काम को सुचारू करने के लिये हर थाना प्रभारी को वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट हर सप्ताह देने के निर्देश दिये ताकि काम निपटाने में तेजी आ सके। उन्होंने पुलिस कर्मियों को अपने अपने कार्यस्थलों की सफाई करने पर लगाया ताकि सफाई के मामले में वो ओरों पर निर्भर ना रहें।

सफाई अभियान तो नहीं परंतु सवाल है किय क्या बाकी दो वजह रहीं उनके तबादले की। उनके तबादले के बाद मोगा में पीपीएस अधिकारी सुरिंदर जीत सिंह मंड मोगा के नये एसएसपी होंगे। 9 साल पहले उन पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ताधारी पार्टी की चुनाव में मदद करने का आरोप लगाया था।

हर साल रेनी सीजन के चलते एक जुलाई से चार महीने के लिए माइनिंग बंद कर दी जाती है। माइनिंग बंद करते समय उस समय तक डंप रेत का पूरा रिकार्ड ठेकेदार व माइनिग अफसर अपने पास रखते हैं। माइनिग बंद होने के बाद किस दिन कितने ट्रक, ट्रैक्टर ट्रालियां रेत भरकर गया, इसका पूरा ब्यौरा दर्ज करना होता है।

मौके पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाने होते हैं। ध्रुमन एच निंबले ने एसएसपी के रूप में पदभार संभालने के बाद सबसे पहले अवैध माइनिंग पर शिकंजा कसते उन्होंने एसपी (डी) जगतप्रीत सिंह के नेतृत्व में रेत माफियाओं पर शिकंजा कसने को टीम बनाकर 19 सितंबर को बड़ी कार्रवाई की थी। आठ लोगों को रेत के साथ गिरफ्तार किया था। मौके से दो पोपलेन मशीन सहित करीब दो करोड़ रुपये की मशीनरी बरामद की गई थी। एक लैपटाप भी पुलिस ने बरामद किया था।

अब तक पांच पोपलेन मशीन बरामद की जा चुकी हैं। उस समय एसएसपी ध्रुमन एच. निंबले ने बताया था कि ठेकेदार ये जबाव नहीं दे सका है कि आखिर पोपलेन मशीन का साइट पर क्या काम था। एसपी (डी) जगतप्रीत सिंह ने माइनिंग अफसर जीएस गिल से एक जुलाई को कुल डंप रेत का ब्यौरा मांगा, कई बार उन्हें रिमाइंडर भी दिया लेकिन उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया था। डीएसपी धर्मकोट सुबेग सिंह की भूमिका भी संदिग्ध मानते हुए उन्हें एसएसपी की ओर से सम्मान दिया गया था।

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