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चर्चा:जगरूप गिल के हलका इंचार्ज बनने से आप का अंदरूनी विरोध दरकिनार, पर नाराज सदस्य मनाना सभी दलों में चैलेंज

बठिंडा5 दिन पहले
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मंगलवार काे आम आदमी पार्टी ने बठिंडा शहर के लोगों में पूर्व कांग्रेसी नेता जगरूप गिल को ओहदा देने की चर्चा को अमली जामा पहना दिया है। आम आदमी पार्टी ने पिछले माह कांग्रेस छोड़कर आप में आए जगरूप गिल व उनकी टीम को ज्वाइंन करवाया था तथा उस समय से उनके हलका इंचार्ज बनने की चर्चाएं थीं, लेकिन लोकल स्तर पर पुराने नेताओं द्वारा आवाज मुखर करने के चलते ओहदा अब दिया गया। गिल को यह ओहदा सौपंकर आप लीडरशिप ने अंदरूनी विरोध को जिस तरह दरकिनार किया है, इससे उनका कद बढ़ा है। आप की शहर में अदद चेहरे की तालाश पूरी होती दिखाई दे रही है तथा फिलहाल गिल उसमें फिट नजर आ रहे हैं।

ऐसे में पार्टी हाईकमान के आदेश का इंतजार कर रहे जगरूप गिल अब राजनीतिक तौर पर सक्रिय होंगे, ऐसा नजर आ रहा है। गिल के लिए सबसे बड़ा चैलेंज अन्य सीनियर आप नेताओं को साथ लेकर चलना होगा, जिसके लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ सकता है। ऐसे में खुले में उनका विरोध करने वाले नेताओं को मनाना उनके लिए आसान नहीं होगा। वहीं देखा जाए तो इस समय आप, कांग्रेस, अकाली दल व भाजपा की स्थिति एक जैसी है जहां चारों पार्टियों में अंतकलह मौजूद है।

आप को थी राजनीतिक चेहरे की तलाश
2017 में दीपक बांसल आप टिकट पर भले ही चुनाव हार गए, लेकिन पार्टी के वोट प्रतिशत से दूसरे दलों में चिंता पैदा हो गई थी, जो अब भी कायम है। पार्टी में उतार-चढ़ाव के बीच दीपक आप छोड़कर खैहरा संग चले गए। वहीं इन तीन सालों में आप का कोई भी नेता पार्टी का तारनहार बनता दिखाई नहीं दिया, हालाकि प्रयास होते रहे, लेकिन वह हाईकमान को इंप्रेस नहीं कर सके। ऐसे में अब कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता जगरूप गिल के कांग्रेस में मनमटाव होने व कांग्रेस छोड़ने के बाद आप को उनमें अपनी पार्टी का अच्छा पोटेंशियल नजर आया तथा उन्हें लेने मंे आप ने बिल्कुल देरी नहीं की तथा अब उन्हें करीब एक माह के अंतराल के बाद शहरी सीट का हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिया है,यानी की यह पूरे कॉडर व नेताओं को स्पष्ट निर्देश है कि वह गिल को यथासंभव उचित सम्मान प्रदान करें। वहीं गिल इसमें मामले में नाराज नेताओं को मनाने का प्रयास करेंगे।

सभी दलों में नाराजगी का वजूद कायम
आप में ही नेता व कार्यकर्ता नाराज हैं, ऐसा कतई सही नही है। बठिंडा मंे मौज्ूद सभी दलों में इस समय अंत कलह मौजूद है। कांग्रेस की बात करें तो सत्तासीन पार्टी में वित्तमंत्री मनप्रीत बादल व जयजीत जौहल के समक्ष कोई कुछ नहीं बोलता, लेकिन पार्टी में अंदरूनी अंसतुष्ता का भाव साफ नजर आता है। कांग्रेस के वर्करों व नेताओं का एक वर्ग अपने मेन स्ट्रीम नेताअों से नाराज है तो दूसरी तरफ शिअद में भी लोकल यूनिट बादल गांव में जाकर अपने ही नेताओं की चर्चा से पीछे नहीं हटे। वहीं भाजपा में भी स्थिति इससे अलग नहीं है। वहां कार्यकर्ताओं की संख्या भले कम हो, लेकिन अपने प्रधान को लेकर उनमें भी नाराजगी है कि पार्टी का संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है तथा टीम टूट रही है। इस तरह चारों ही दलों में दूसरा ग्रुप मौजूद है जिससे मेन स्ट्रीम नेता परेशान हैं, लेकिन जाहिर नहीं करत हैं।

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