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दुर्भाग्यपूर्ण:तीन डॉक्टरों केे इस्तीफे के बाद चौथे का नोटिस, कोरोना मरीजों की बढ़ेगी मुश्किलें

बठिंडाएक महीने पहलेलेखक: संजय मिश्रा
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डाक्टर का इंतजार....उपचार के लिए सिविल अस्पताल में पहुंचे मरीज डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे। - Dainik Bhaskar
डाक्टर का इंतजार....उपचार के लिए सिविल अस्पताल में पहुंचे मरीज डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहे।
  • कोरोनाकाल में सिविल अस्पताल से उम्मीद लगाकर बैठे मरीजों को झटका

कोरोना काल में जहां सिविल अस्पताल पहले ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है, वहीं अब एमडी डाॅक्टरों के नौकरी छाेड़ने से सेहत विभाग की चिंता तथा मरीजों के लिए परेशानी बेहद बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल में तैनात एमडी मेडिसिन डाॅ. जयंत अग्रवाल के बाद एमडी मेडिसिन डाॅ. रमनदीप गोयल और आंखों की माहिर डाॅ. दीपक गुप्ता के नौकरी से इस्तीफा देने से व्यवस्था पर बोझ बेहद बढ़ गया है। वहीं अब एक महिला एमडी मेडिसन डाक्टर के नौकरी छाेड़ने के लिए विभाग को तीन महीने का एडवांस नोटिस भेजने के बाद परिस्थितियां बेहद विकट रूप लेती नजर आ रही हैं।

कोरोना के इस दौर में जब लोग बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं, वहीं एक के बाद एक सीनियर डाॅक्टर्स का नौकरी छोड़ने का फैसला बेहद अचरज भरा व कई सवाल खड़े करता है। वहीं इस मामले को गंभीर मानते हुए एसएमओ डाॅ. मनिंदर सिंह ने कहा कि इस कठिन समय में इस तरह के फैसले बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इस पर डीसी बठिंडा बी. श्रीनिवासन ने कहा कि जल्द ही डाक्टरों की कमी को कांट्रेक्ट के जरिए पूरा किया जा रहा है, वहीं एडिशनल स्टाफ लिया जा रहा है।

पिछले एक साल से डॉक्टरों का वर्कलोड बढ़ा, स्ट्रैस के चलते छोड़ रहे काम
सिविल अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड की जिम्मेदारी संभाल रहे नोडल अफसर एमडी मेडिसन डाॅ. जयंत अग्रवाल ने एक सप्ताह पहले ही इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि उन्होंने इस्तीफा देने का कारण नहीं बताया, लेकिन इसे उनके ऊपर चल रहे वर्कलोड से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं उनके बाद ओपीडी में तैनात एमडी मेडिसन डा. रमनदीप गोयल ने भी इस्तीफा दे दिया है। वह छह माह पहले नोटिस दे चुकी थीं, लेकिन उनका इस्तीफा हेल्थ सिस्टम द्वारा मंजूर नहीं किया गया था।

इसके बाद पुन: उन्होंने तीन माह का नोटिस दिया जिसके बाद वह भी नौकरी छोड़ गई हैं। व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए डा. रमनदीप गोयल ने कहा कि कोविड-19 से इस्तीफे का कोई लेना-देना नहीं है। वह 6 माह पहले ही इस्तीफे के लिए आवेदन कर चुकी थीं। अब कुछ समय पहले नौकरी पर ज्वाइन कर चुकीं आई सर्जन डा. दीपक गुप्ता भी इस्तीफा सौंप चुकी हैं, लेकिन इस्तीफे पर कुछ नहीं बोलीं।

मरीजों की परेशानी बढ़ी
दो डॉक्टरों द्वारा नौकरी छोड़ने से अब पूरी ओपीडी की जिम्मेदारी बाकी बचे दो डाक्टरों पर रह गई है। ऐसे में मरीजों की परेशानी बेहद बढ़ती नजर आ रही है। कोरोना में एमडी मेडिसन ओपीडी में अब डा. हरिंदर सिंह और डा. गुरिंदर कौर ही तैनात हैं। वहीं तलवंडी साबो अस्पताल में तैनात डा. जगरूप सिंह को अस्थाई तौर पर सिविल अस्पताल बठिंडा में तैनात किया है।

एमडी मेडिसन डाॅक्टर्स की कोरोना ट्रीटमेंट में अहम भूमिका
कोरोना से ग्रस्त मरीजों के इलाज में एमडी मेडिसन की भूमिका बेहद विशेष होती है। कोरोना में मरीज का क्या लेवल है तथा उनकी क्या स्थिति है तथा उन्हें किस तरह का ट्रीटमेंट दिया जाना है, यह सब सीनियर डाक्टर्स तय करते हैं। कोरोना में एमडी मेडिसन की भूमिका सबसे अहम होती है।

अधिकारी बोले -यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि डाक्टर ऐसे समय में नौकरी छोड़ रहे हैं जब उनकी सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्हें सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित किया जाता है और जब सेवा करने का समय होता है, तो वे अपनी सुविधा के अनुसार नौकरी छोड़कर चले जाते हैं। बहरहाल मरीजों को परेशानी न आए इसके लिए प्रयत्न किए जा रहे हैं।
डा. मनिंदर पाल सिंह, सिविल अस्पताल एसएमओ

अन्य जगहों से डाक्टर्स को यहां लाया जा रहा
सिविल अस्पताल में एमडी मेडिसन डाक्टरों के इस्तीफा देना चिंतित करने वाला है, लेकिन इसके लिए हम पुख्ता प्रबंधन कर रहे हैं। कांट्रेक्ट पर हेल्थ टीमें तैनात करने के अलावा अन्य जगहों से सीनियर डाक्टर्स को यहां लाया जा रहा है ताकि कोरोना मरीज प्रभावित नहीं हों। प्रशासन अपनी तरफ से हर समस्या के निदान में जुटा हुआ है।
बी. श्रीनिवासन, डीसी, बठिंडा

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