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लापरवाही:कोरोना मरीजों को आइसोलेशन वार्ड तक पहुंचाने वाली एंबुलेंस एक सप्ताह से खराब

बठिंडा10 महीने पहले
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  • एंबुलेंस अनफिट भी हो चुकी है, फिर भी इसे मरीजों को लाने-लेजाने के लिए किया जा रहा प्रयोग

शहीद भाई मनी सिंह सरकारी अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए 4 एंबुलेंस तैनात हैं। इनमें कुछ एंबुलेंस अनफिट होने के बाद भी प्रयोग में लाई जा रही हैं। इनमें से एक एंबुलेंस ऐसी भी जो करीब 20 वर्ष पुरानी है। एंबुलेंस नंबर पीबी03एच-5962 जो स्टेट हेल्थ अफसर के नाम रजिस्टर्ड है, जिसका इन दिनों बीमा भी नहीं है।

विभाग द्वारा इस एंबुलेंस को कोविड-19 के लिए रिजर्व किया गया है। जबकि कोविड-19 में आधुनिक सुविधा वाले एंबुलेंस का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। लेकिन जिला अस्पताल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा। अस्पताल के किसी भी एंबुलेंस में मरीज को इमरजेंसी में प्राथमिक सहायता उपलब्ध करवाने वाले पूरे उपकरण नहीं है।

चार में से तीन एंबुलेंसों को इमरजेंसी में गंभीर मरीजों की सुविधा के लिए रखा गया है। हालत यह है कि करीब 5 दिन पहले बादल रोड स्थित मेडीटोरियस स्कूल में बनाए गए कोविड वार्ड से मरीज कोरोना पॉजिटिव मरीज शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस की जरूरत पड़ी।

इस दौरान एंबुलेंस चालक अस्पताल एंबुलेंस स्टार्ट करने के लिए सैल्फ लगाया तो स्टार्ट ही नहीं हुई, बताया जा रहा है कि एंबुलेंस चालक एंबुलेंस स्टार्ट करने के लिए करीब दो घंटे का समय लगा दिया। लेकिन एंबुलेंस किसी भी तरह स्टार्ट नहीं हुई। इस एंबुलेंस को जिला अस्पताल की ओर से कोरोना के मरीजों को इधर-उधर ले जाने के लिए सौंपा गया है।

जबकि चालक द्वारा एंबुलेंस खराब होनी की जानकारी अस्पताल अधिकारियों को उसी दिन दे दी गई, लेकिन सप्ताह बीत जाने के बाद भी खराब एंबुलेंस को रिपेयर नहीं करवाया गया, एंबुलेंस जिस स्थान पर खराब हुई थी, वह उसी स्थान पर आज भी खड़ी है।

एंबुलेंस चालकों ने बताया कि एंबुलेंस काफी पुरानी होने के कारण अनफिट भी हो चुकी है, फिर भी इसे मरीजों के इलाज में प्रयोग किया जा रहा है। अगर एंबुलेंसों की समय-समय पर सर्विस व रिपेयर होती तो इसकी ऐसी हालत ही न होती। गोनियाना अस्पताल को कुछ दिन पहले सरकार की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई थी, इन दिनों अस्पताल प्रबंधकों द्वारा उक्त एंबुलेंस को कोविड-19 के लिए प्रयोग की जा रही है।  

सरकारी एंबुलेंस में नहीं हैं पर्याप्त उपकरण

एंबुलेंस के अंदर एसी व पंखा, ऑक्सीजन, सेक्शन मशीन, स्लाइन, जरूरी दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। हार्ट अटैक के मरीज के लिए एंबुलेंस में काडिए डियुकिबेलेटर मशीन, एक चालक, एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन व एक स्टाफ नर्स 24 घंटे तैनात रहने चाहिए, मरीजों को चढ़ाने और उतारने के लिए तीन तरह के स्ट्रेचर व ट्रॉली होने चाहिए।

उक्त उपकरण में मात्र स्ट्रेचर व आक्सीजन सिलेंडर ही उपलब्ध है। इस संबंध में सिविल अस्पताल के एसएमओ डा. मनिंदर पाल सिंह से फोन पर जानकारी प्राप्त करनी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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