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सम्मान:उधारी से भाई का करवाया इलाज, ठीक हुआ तो अहसान चुकाने को 5 हजार किए ऑफर

बठिंडाएक महीने पहले
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  • घरों में बर्तन मांज दो वक्त की रोटी कमाती बहन की कर्त्तव्यनिष्ठा व दरियादिली के आगे सब हैरान

कहते हैं पंजाबियों के लिए आत्म-सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं है। ऐसा ही एक मामले में जहां कोरोना के इलाज के नाम पर जहां कई प्राइवेट अस्पतालों ने लाखों रुपये चार्ज करने से गुरेज नहीं किया, वहीं घरों में बर्तन व झाडू पोछा करती एक जरूरतमंद बहन ने जमा पूंजी खर्च होने के बाद अपने भाई का चेरिटेबल कोविड केयर सेंटर में इलाज करवाया तथा उसके ठीक होने पर संस्था को अपनी मेहनत की कमाई से 5 हजार रुपये डरते हुए देने को हाथ बढ़ाया।

बाबा दीप सिंह नगर निवासी 55 वर्षीय प्रेम कुमार, जो दो वक्त की रोटी घरों में झाडू-पोछ़ा लगाकर कमाती हैं, ने भाई व अपनी बचत के अलावा उधार लेकर प्राइवेट अस्पताल में तीन दिन तक इलाज करवाया, लेकिन पैसे खत्म होने पर उन्हें अस्पताल से वापस घर आना पड़ा, लेकिन एक बहन के अंर्तमन को कचोट रही भाई की सेहत की बात ने उन्हें रास्ता दिया तथा किशोरी राम रोड स्थित चेरिटेबल कोविड केयर सेंटर में आईं जहां कुछ दिनों के इलाज के बाद उनका भाई स्वस्थ हो गया, लेकिन अहसान के बदलने में उन्होंने डरते हुए संस्था को मेहनत के 5 हजार रुपये देने की हिम्मत दिखाई। हालांकि संस्था ने हाथ जोड़ पैसे नहीं लिए, लेकिन एक बहन के द्वारा शगुन के दिए 500 रुपये से बड़ा आशीर्वाद कोई दूसरा नहीं हो सकता।
प्रेम कुमारी ने भाई के इलाज को खर्च कर दी सारी जमा-पूंजी
बाबा दीप सिंह नगर निवासी 55 वर्षीय प्रेम कुमारी अपने दो वक्त की रोटी के लिए आराम से बैठने की बजाए 5-6 घरों में झाडू-पोछे का काम करती हैं जो उनकी आमदनी की मुख्य जरिया है, लेकिन अचानक ही छोटे भाई 50 वर्षीय राजकुमार के पॉजिटिव होने के बाद प्रेम कुमार ने बहन व भाई के बेटे द्वारा जोड़े गए 30 हजार रुपये सहित अपनी नेक कमाई के 10 हजार बचत के रुपये के अलावा 8 हजार घरों से उधार इकट्‌ठा किया जहां वह काम करती हैं तथा भाई को एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल करवाया दिया, लेकिन तीन ही दिन में 48 हजार रुपये खर्च होने के बाद भाई को घर वापस लाने का कोई चारा नहीं बचा तथा दिन-रात भाई की सलामती के अलावा दूसरी कोई बात नहीं सूझी। एक बार तो हालत यह हो गई कि पैसे के अभाव में अगर कोई अनहोनी हो गई तो वह अपने आप को कतई माफ नहीं कर पाएंगी।
निष्काम सेवा सेवा की बदौलत मिली भाई को जिंदगी
प्रेम कुमारी ने कहा कि सभी तरफ से उम्मीद खत्म होने के बाद उन्हें किशोरी राम रोड पर नौजवान नाम की संस्था द्वारा सेवा वाला कोविड सेंटर चलाने का पता लगा तो भाई की रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने भर्ती करने पर सहमति दे दी जिसके बाद मेरी जान में जान आई।

उन्होंने कहा कि भाई कई दिन के इलाज के बाद ठीक हुआ तो अब ऐसे जाने को मन ने अच्छा नहीं समझा। इसलिए फिर 5 हजार रुपये जैसे-तैसे जुटाकर संस्था को देने की कोशिश की, लेकिन मन में डर था कि वहां तीन दिन में सारे पैसे लग गए, यहां इतने दिनों तक भाई का ख्याल रखा गया है, कोई खर्च नहीं हुआ। घरों में काम कर पैसे इकट्‌ठे करती हूं, इसलिए जितने बन सके, उनके सामने रख दिए।
नौजवान सोसायटी के प्रधान महेश्वरी बोले, इससे बड़ा आशीर्वाद कोई नहीं
वहीं चेरिटेबल कोविड केयर सेंटर चला रहे नौजवान वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सोनू महेश्वरी ने कहा कि उनकी संस्था डा. वितुल गुप्ता जी के सहयोग से ही कोविड मरीजों की सेवा संभाल कर रहे हैं। जब मां समान प्रेम कुमारी जी ने अपनी दिन-रात मेहनत से इकट्‌ठी की खून पसीने की कमाई 5 हजार हमें लेने को कहा तो कानों को सहसा यकीन नहीं हुआ कि जरूरतमंद होने के बावजूद उनका ह्दय इतना बड़ा है कि वह पैसे उधार लेकर हमें दे रही हैं। हालांकि वह हमें शगुन के 500 रुपये देकर गईं, जो हमारी संस्था की सबसे बड़ी नेक कमाई है।

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